मुंबई।हमारे समाज में फिल्म मनोरंजन का सबसे बडा साधन है , आजकल फिल्मों के जरिए रातों-रात कमाई करने के लिए मनोरंजन  से  ज्यादा अश्लीलता प रोसी जाती है। भोजपुरी फिल्मों को इसी नजर से  देखा जाने लगा है। लाइसेंस  के साथ बड़े पर्दे पर फूहड़ता दिखाई जाती है। फिल्म की  डिमांड न  हो तो भी जबरदस्ती अश्लीलता परोसी जाती  है। कमाई बढाने के लिए अश्लीलता का ज्यादा इस्तेमाल होने से लगा है, जिससे समाज में यौन कुंठा की अभिव्यक्ति बढती जा रही है , यही वजह है कि यौन उत्पीड़न  के मामले हमारे पूर्वांचल में होने लगे हैं। भोजपुरी फिल्मों
की बढती हुई अश्लीलता को लेकर पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान ने मुंबई के एक सभा का आयोजन किया ।पूर्वांचल
विकास प्रतिष्ठान आर्थिक औधोगिक विकास और सास्ंकृतिक बदलाव को लेकर एक अभियान शुरू किया है , जिसमें भोजपुरी फिल्मों में बढती हुई अश्लीलता का विरोध किया जा रहा है और भोजपुरी फिल्मों में बढ़ रही अश्लीलता के खिलाफ सख्त कानून की मांग की जा रही है। लोग चाहते  हैं कि महाराष्ट्र डांस बार एक्ट की तरह ही भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता के खिलाफ सख्त कानून पारित करने की बात कही ।

 क्या है भोजपुरी फिल्मों का इतिहास

असल में भोजपुरी फिल्म का मुख्य क्षेत्र बिहार और उत्तर प्रदेश है , भोजपुरी की पहली फिल्म ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढइबो ’विश्वनाथ शाहाबादी द्वारा निर्मित 1961 में प्रदर्शित की गई थी । आमतौर पर भोजपुरी फिल्मों को 1980 के दशक में एक व्यवसाय के रूप लाया गया । 1982 में गोविंद मनीष ने ‘नदिया के पार ’ का र्निदेशन किया जो भोजपुरी फिल्म का इतिहास बन गया यानि यह फिल्म ब्लाॅक बस्टर फिल्म थी । भोजपुरी फिल्मों में बाॅलीबुड सिनेमा के कई सितारों ने भी काम किया है जिनमें अमिताभ बच्चन और मिथुन चक्रवती भी शामिल है ,भोजपुरी फिल्मों का इतिहास भोजपुरी कवि मनोज भावक के नाम के बैगेर अधूरा है , इन्हें भोजपुरी फिल्म का ‘विश्वकोश ’ माना जाता है ।

मनोरंजन के नाम पर फूहड़ता 

भोजपुरी फिल्मों का आज किन आज के समय में भोजपुरी फिल्मों की स्थिति बहुत ही खराब है , वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश ने भी अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि हमारे समाज पर भोजपुरी फिल्मों और उनके गानों की वजह से गलत प्रभाव पड़ रहा है , जिससे हमारी मान मर्यादा और सुरक्षा खतरे में है, आज हमारे समाज में इस अश्लीलता की वजह से सारी संवैधानिक संकल्पना खत्म हो चुकी  है । फिल्म की अश्लीलता की वजह से पुर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह और पूर्व मंत्री चंद्रकांत त्रिपाठी ने भी इस फूहड़ता का प्रतिकार किया । उन्होंने कहा कि हमारी महिलाएं और बच्चों के  भविष्य पर इसका गहरा प्रभाव पडेगा । यही कारण है कि 26 अगस्त को भोजपुरी फिल्मों की अश्लीलता के लिए एक कडा कानून बने उसके लिए बनारस हिन्दू विश्वविधालय में विशाल जनसभा का आयोजन किया जा रहा है ।

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