एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी औऱ उनकी पूरी सरकार पूरे देश में स्वच्छता अभियान को जोर शोर से कार्यान्वित करने में जुटी है। दूसरी तरफ हम अपने ही देश में गंदगी फैलाना, गंदगी में बसर करना और और गंदगी को अपने जीवन का हिस्सा बनना अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं।

हम आज जो वीडियो आपको दिखा रहे हैं, वो देखकर आपको लगेगा कि क्या वाकई में देश को स्वच्छ रखना महज सरकार की जिम्मेदारी है। आम जनता और अधिकारियों के हिस्से भी कोई काम आता है या नहीं। यह वीडियो दिल्ली का दिल कहे जाने वाले ल्यूटियन जोन का है। इंडिया गेट के पास अवस्थित कृषि भवन जहां कृषि के साथ और भी कई दूसरे मंत्रालयों का दफ्तर है, जिसके अहाते में घुसने के लिए सुरक्षा इतनी चाक चौबंद की बिना पूर्व अनुमति के आप वहां प्रवेश पाने की सोच भी नहीं सकते। उस इमारत के अहाते के शौचालय की स्थिति इतनी दयनीय है कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। कतार में लगी गाडि़यों की पार्किंग के साथ बाहर से सुंदर दिखने वाले शौचालय का निर्माण किया गया है। शौचालय के ठीक बाहर स्वच्छता अभियान को प्रचारित करती गांधी के चश्मे वाली होर्डिंग भी लगी है लेकिन अंदर जाने पर लगता है कि यहां के जिम्मेदार अधिकारी अंधे ही नहीं गूंगे और बहरे भी हैं। बदबू और गंदगी से शौचालय में आप एक पल खड़े नहीं हो सकते और अगर कुछ देर खड़े हो गए तो निश्चित तौर पर कोई न कोई बीमारी साथ ले जाएंगे। आप इस वीडियो को देखें उससे पहले आपको याद दिला दें कि हर दो अक्टूबर को तमाम अधिकारी और नेता इस इलाके में झाड़ू लगाते और तस्वीरें खिंचाते  मिल जाएँगे।

अभी चंद रोज पहले ही बिहार के मधुबनी रेलवे स्टेशन का हाल हमने मीडिया में देखा, जिस रेलवे स्टेशन को कुछ स्वंयसेवी संस्थाओं ने अपनी लगन औऱ मेहनत से देश के सबसे खूबसूरत रेलवे स्टेशन में शुमार कर दिया था उसे हम में से ही कुछ लोगों ने इतना गंदा कर दिया कि देश के बाकी हिस्सों के लिए वो खबर बन गई। खूबसूरत मिथिला पेंटिंग वाली दीवारों पर लोगों ने पान और थूक की लड़ी लगा दी, सारी पेंटिंग बदरंग हो गईं और दीवार गंदी।

निश्चित ही सारा मामला चिंता का विषय है और हर स्तर पर लोगों की अपनी जिम्मेदारी से भागने का नतीजा। मीडिया सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए यह वीडियो देश की जनता, अधिकारी और नेता के सामने रख रहा है

 

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