फेसबुक पर Vasant Christy नाम के एक यूजर ने 4 सितंबर को एक विडियो शेयर किया जिसमें एक बुजुर्ग सिक्योरिटी गार्ड पानी के साथ रोटी खाता दिख रहा है।इस विडियो की असल सच्चाई क्या है इसके बारे में ज्यादा तो नहीं जानते मगर इतना जरूर जानते हैं कि जब भूख लगती है तो खाना का स्वादिष्ठ होना या ना होना कोई मायने नहीं रखता है। अगर कुछ मायने रखता है तो वो है पेट , जिसे किसी भी तरह भरना है। आज के समय में देश और दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भूखे पेट सोने के मजबूर है। पूरी दुनिया में उगने वाले कुल खाद्य संसाधनों का करीब एक तिहाई हिस्सा कोई भी नहीं खा पाता। इस ‘पोस्ट-हार्वेस्ट’ बर्बादी के कारण कितने ही लोग आज भी भूखे सोते हैं।

जब भी हम पेट भरने की बात करते हैं तो सारी चर्चा का केंद्र किसी तरह उत्पादकता बढ़ाने पर आ जाता है। इस सबमें एक महत्वपूर्ण बात को नजरअंदाज कर दिया जाता है और वह है खाने की बर्बादी।इस पोस्ट-हार्वेस्ट बर्बादी के कारण आम लोगों पर गहरा असर पड़ता है जिससे कई लोग कुपोषण के भी शिकार हो जाते हैं।जीवन गुजारने वालों और भीख मांगकर गुजारा करने वालों को विभिन्न कारणों के चलते भूखे पेट सोने को मजबूर होते हैं। लगातार 12 घंटे काम करने वाले एक बुजुर्ग सिक्योरिटी गार्ड को पानी के साथ रोटी खाना उसके लिए कोई नई बात नहीं रही होगी ऐसे बहुत से लोग हैं जो इस तरह से अपनी जिदंगी गुजारने को मजबूर हैं।

हम सब दिन रात मेहनत करते हैं,एक वक्त की रोटी के लिए मारे-मारे फिरते हैं और जिंदगी की गाड़ी को खींचते हुए आगे बढ़ते हैं।हमारे समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अपनी मर्जी के अनुसार न सिर्फ खाते हैं, बल्कि बर्बाद करने से भी नहीं झिझ​कते। हमारी दुनिया में लाखों-करोड़ों ऐसे लोग भी हैं, जो एक वक्त के खाने को भी तरसते हैं? जिनके पेट खाली होते हैं, वो सिर्फ निवाले को जानते हैंऔर कुछ भी नहीं। विडियो शेयर करने वाले लोगों से यही गुजारिश है कि वह खाना बर्बाद ना करें,ताकि भूख से किसी की जान न जाए। यहां सवाल सिर्फ सरकार से नहीं है,बल्कि सवाल तो उनसे भी है, जिनका खाना फेंकना फितरत हो जाती है।अफसोस की बात तो यह है कि इस बात पर अभी भी लोग जागरूक होने के बजाए भावुक हो जाते हैं। ​

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