सीबीआई के निदेशक और उप निदेशक के बीच ठनी लड़ाई के बाद के विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया। सीबीआई निदेशक को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के सरकार के फैसले को सुप्रीम अदालत ने निरस्त कर दिया। सुप्रीम अदालत के इस फैसले के बाद अब आलोक वर्मा दोबारा अपने पद पर आसीन होंगे। हालांकि अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि जांच पूरी होने तक वो बड़े नीतिगत फैसले नहीं ले सकेंगे। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है।

क्या है पूरा मामला

सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और एजेंसी के नंबर-2 अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप मढ़े थे। विवाद मीडिया में उछला और दोनों सरेआम एक दूसरे पर आरोप लगाने लगे इसके बाद सरकार ने दोनों अफसरों को 23 अक्टूबर को छुट्टी पर भेज दिया था। वर्मा 31 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं।

6 दिसंबर से सुरक्षित था फैसला 

सुप्रीम अदालत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में इस मामले की सुनवाई हुई औऱ बेंच ने 6 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसले के दिन यानी मंगलवार ८ जनवरी को चीफ जस्टिस छुट्टी पर थे इसलिए फैसला जस्टिस संजय किशन कौल और केएम जोसेफ की बेंच ने सुनाया।

राव को अंतरिम प्रमुख बनाने का आदेश भी निरस्त

इतना ही नहीं सुप्रीम अदालत ने सीनियर आईपीएस अफसर एम नागेश्वर राव को सीबीआई का कार्यकारी निदेशक  बनाए जाने के केंद्र के आदेश को भी निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है कि सरकार चयन समिति की इजाजत के बगैर सीबीआई निदेशक को पद से हटाए।

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