अनुरंजन झा लेखक, चिंतक और मीडिया सरकार के सीईओ

“राणा यशवंत” नाम आते ही न्यूज टेलीविजन की दुनिया में काम करने वाले एक ऐसे शख्स की छवि उभरती है जो इस भागदौड़ और आपाधापी वाले टीवी न्यूज के जमाने में भी ठहर-ठहर कर मजबूत कदम आगे बढ़ाता है। न्यूजरुम में काम करने वालों सहयोगियों के बीच एक ऐसा शख्स जिसे खबर, खबर की अहमियत, खबर का प्रभाव और खबर का खेल करीने से मालूम है तभी तो यह शख्स पिछले पांच साल से लगातार “अर्धसत्य” के जरिए पूर्णसत्य बयान कर रहा है। वर्तमान में इंडिया न्यूज चैनल में ग्रुप मैनेजिंग एडिटर के पद पर आसीन राणा यशवंत हमारे लिए पिछले दो दशक से ज्यादा समय से बड़े भाई हैं, बिना बदले एकसमान । हम पिछले बीस सालों से यह जानते हैं कि न्यूज की कठोर दुनिया में अपना सबकुछ झोंकने वाले इस शख्स के अंदर एक कवि, एक गीतकार , एक कलाकार बसता है, दरअसल सही मायनों में एक इंसान बसता है।

आप सोच रहे होंगे आज हम उनकी बात अचानक क्यूं कर रहे हैं, तो बात ही कुछ ऐसी है।  पिछले ३० नवंबर की रात दिल का दौरा पड़ने के बाद, जब वो स्वस्थ हुए तो परिवार और शुभचिंतकों ने कुछ वक्त आराम की ताकीद की और उनसे सख्ती से उसका पालन भी कराया गया। लेकिन लगातार काम करते रहने वाले का जुनून ऐसा होता है कि वो हर हालत में काम ही करते रहना चाहता है। इस आराम के दौरान का नतीजा – दरमियां के रुप में आ रहा है, जी ..राणा यशवंत की ग़ज़लों का अलबम “दरमियां” जल्द आनेवाला है। काम का जज्बा देखिए शनिवार ९ फरवरी को उन्होंने दोबारा ऑफिस में कार्यभार संभाला और उसी दिन टाइम्स म्यूजिक ने दरमियां का प्रोमो रिलीज किया। मतलब जिसको काम से इश्क हो जाए वो खाली बैठ ही नहीं सकता। दो साल पहले जब उनकी पहली किताब – अंधेरी गली का चांद- कविता संग्रह के रूप में लोगों के सामने आई तो तब जमाने को उनके इस कवि हृदय का दीदार हुआ । उस पुस्तक के विमोचन के वक्त मौजूद प्रख्यात लेखक-कवि, केदारनाथ सिंह और मंगलेश डबराल ने तो प्रेम कविता की दुनिया में नया हस्ताक्षर कह कर संबोधित किया । अब उनका नया आनेवाला अलबम नई उम्मीद जगाता है।

उम्दा सोच, शानदार शब्द और अद्भुत कलम इस अलबम के जरिए प्रेम, संबंध और बेचैनी को एक अलग तरीके

से बयान करते हैं।हम सबको उनके इस आनेवाले अलबम का इंतजार है। राणा यशवंत ने जब से अपना कार्यक्रम अर्धसत्य शुरु किया तब से हम लगातार उनसे चर्चा करते रहे हैं इस सीरीज के मजबूत किस्सों को भी अलबम और किताब के तौर पर लाने की जरुरत है, हमारी सलाह को अमलीजामा पहनाते हुए इन दो महीनों में उनकी इस किताब की रुपरेखा भी तय हो गई है। “अर्धसत्य” के अलावा राणा यशवंत ने “मन पाखी” नाम से एक प्रेम उपन्यास का प्लॉट भी तैयार कर लिया है। अब आप समझ सकते हैं इस

 

इंसान में काम करने का जुनून किस कदर हावी है। जब वो बीमारी के बाद आराम कर रहा है तो अपने अंदर की भावनाओं को कभी किताब और कभी गज़ल के रुप में संजो रहा है। मेरे बड़े दादाजी ने अपनी एक ऐतिहासिक किताब “दुर्ग का घेरा” की भूमिका में लिखा था कि जीवन में कुछ ऐसा लिखो कि लोग पढ़ें और कुछ ऐसा करो कि लोग आपके बारे में लिखें तभी आपका जीवन सफल है- हमें तो राणा यशवंत उसी रास्ते पर चलते नजर आते हैं।

फिलहाल अद्भुत अहसास अपने साथ बहाकर ले जाते हुए “दरमियां”का प्रोमो जरुर सुनिए। इस अलबम के आने से पहले ही राणा यशवंत को अनंत शुभकामनाएं और बधाई.

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