बिहार के प्रतिष्ठित कवि रमेश चंद्र झा की कविताएं बिहार सरकार ने आठवीं के पाठ्यक्रम में शामिल किया है। पचास से लेकर अस्सी के दशक तक लगाातर अपनी कविताओँ औऱ लेखनी से बिहार के जनमानस पर राज करने वाले लेखक कवि रमेशचंद्र झा की यह कविता भोजपुरी में देशगीत है और भोजपुरी के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। बिहार शिक्षा बोर्ड ने आठवीं की पाठ्यपुस्तक का नाम भोर रखा है, भोर यानी अहले सुबह । इस पाठ्यपुस्तक की पहली कविता ही देशगीत है। इस पुस्तक में बिहार के और कई नामचीन कवियों और लेखकों की रचनाएं हैं।

पुस्तक में उनके जीवन परिचय में संक्षिप्त में जानकारी दी गई है। रमेश चंद्र झा को भोजपुरी के पहले धारावाहिक उपन्यास “सुरमा सगुन बिचारे ना” लिखने का श्रेय प्राप्त है। यह उपन्यास उस वक्त पटना से प्रकाशित होने वाली साप्ताहिक पत्रिका अंजोर में धारावाहिक के तौर पर प्रकाशित हुई थी। रमेश चंद्र झा ने अपनी जवानी आजादी की लड़ाई में और बाद का जीवन साहित्य साधना में व्यतीत किया। अपने गांव में रहकर उन्होंने अपने जीवन काल में बहत्तर पुस्तकों की रचना की इसके अतिरिक्त कई रचनाएं अधूरी पांडूलिपी के तौर पर रह गईं। रमेश चंद्र झा महान स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मीनारायण झा के सबसे बड़े पुत्र थे उनके दो और भाइयों में प्रख्यात शिक्षक गुरुवर दिनेश चंद्र झा और वीर चक्र से सम्मानित महेश चंद्र झा शामिल हैं।

रमेश चंद्र झा की स्मृति में उनके पैतृक गांव में भोर नामक संस्था द्वारा हर साल देश के एक प्रतिष्ठित कवि या लेखक को सम्मान भी दिया जाता है। रमेश चंद्र झा के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

https://en.wikipedia.org/wiki/Ramesh_Chandra_Jha

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