अनुरंजन झा, सीईओ, मीडिया सरकार

आदरणीय हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी।

इससे पहले कई लोगों ने आपको पत्र लिखा होगा लेकिन मेरे द्वारा आपको लिखा जाने वाला यह पहला पत्र है, आखिरी है कि नहीं यह मैं नहीं जानता। आपको यह पत्र मैं लिखने को मजबूर इसलिए हुआ हूं कि मैं वास्तव में काफी डरा हुआ हूं और इस आश्चर्य से और डर जाता हूं कि आप क्यूं नहीं डरे हुए हैं। २०१४ में आपके सत्ता में आने के बाद से “देश बदल रहा है”  लेकिन फिर मैं क्यूं डरा हुआ हूं या शायद इसी से डरा हुआ हूं।  आजकल मैं इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रहा हूं।

वैसे जो हमें जानते हैं वो यह मानते हैं कि मैं डरता नहीं हूं, फिर भी आज मैं डरा हुआ हूं। मैं तब भी नहीं डरा था जब आमिर खान की पत्नी किरण राव ने अपने डर की बात की थी। मैं तब भी नहीं डरा था जब देश को खूबसूरत दुनिया के सपने दिखाने के बाद आपके पार्टी अध्यक्ष ने आपके वादों को जुमला करार दिया था। मैं तब भी नहीं डरा था जब अवार्ड वापसी गिरोह ने चाल चली।  मैं तब भी नहीं डरा जब आपलोगों की गलती से बिहार में लालू यादव शासन में आ गए। मैं तब भी नहीं डरा जब कश्मीर में आतंकवाद की जड़ मुफ्ती परिवार के साथ आपने हाथ मिला लिया। मैं तब भी नहीं डरा जब आप अचानक लाहौर पहुंच गए मियां नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई देने। मैं तब भी नहीं डरा जब आपने रात को अचानक हमारी मां-बहन-पत्नी की सालों की बचत को एक झटके में बाहर ला दिया। मैं तब भी नहीं डरा जब जिस टैक्स नीति का आप सालों विरोध करते रहे उसे आपने आजादी के बाद की सबसे बड़ी घटना करार दिया। मैं तब से लेकर अब तक इस बात से भी नहीं डरा कि इक्का दुक्का न्यूज चैनलों-अखबारों और पत्रकारों को छोड़कर आपसे कोई सवाल नहीं पूछता।

यकीन मानिए कि गोरी लंकेश की मौत पर काफी दुख हुआ लेकिन तब भी मुझे डर नहीं लगा। आपका ट्वीटर हैंडल किस-किस को फॉलो करता है इससे भी डर नहीं लगता। लेकिन ..अब अंदर से डरा हुआ हूं जब एक सात साल के मासूम की नृशंश हत्या उसी के पांच सितारा स्कूल में कर दी जाती है। मैं भी एक पिता हूं इसलिए ज्यादा डरा हुआ हूं, हो सकता है कि इस डर का एहसास आपको नहीं हो, लेकिन इस डर का एहसास आपको होना चाहिए क्योंकि आप हमारे प्रधानमंत्री हैं। हमारा डर तब और गहरा हो जाता है जब उस स्कूल का प्रबंधन आपके साथ अपनी तस्वीर वायरल कराता है, जब वो देश के गृहमंत्री के साथ अपनी तस्वीर वायरल कराते हैं और आपकी तरफ से कोई जवाब नहीं आता। डर और बढ़ जाता है जब आपके स्थानीय नेता टीवी चैनलों पर बैठकर इस मासूम की लाश पर लीपापोती और राजनीति करने से बाज नहीं आते। मैं डरा हुआ हूं क्योंकि जिस प्रदेश में इस मासूम की स्कूल में हत्या हुई है उस प्रदेश के मुख्यमंत्री को हाल ही में कानून व्यवस्था विफल होने के बाद और पैंतीस से ज्यादा लोगों की जान जाने के बाद भी आपने हटाया नहीं। डर रहा हूं क्यूंकि आप जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं और आपकी नाक के नीचे भ्रष्ट आचरण वालों की कतार लंबी होती जा रही है। हमें डर तब लगता है जब स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया का नारा देते हैं और आप स्किल डेवलमेंट मंत्री को नक्कारेपन की वजह से पद से हटाते तो हैं लेकिन तीन साल बाद। हमें डर तब लगता है जिस गंगा मां ने आपको बनारस बुलाया उसकी सफाई तीन साल में तिनके के बराबर नहीं हुई।

जब हम बच्चे थे और स्कूल पहुंच जाते थे तो माता-पिता संतुष्ट रहते थे कि अगले ६ घंटे हम सुरक्षित हैं। यही सोच हम सबके अदंर है, हम भी जब अपने बच्चे को स्कूल के अहाते में पहुंचाते हैं को सुकून रहता है कि अब वो सुरक्षित हाथों में हैं लेकिन वहां अगर किसी मासूम की हत्या हो जाए जिसे यह तक नहीं पता हो कि हत्या क्या होती है औऱ मेरा क्या कसूर है। वाकई डर लगता है कि आखिर हम कैसा समाज बना रहे हैं। आपके अँध भक्त यह कहेंगे कि स्कूल में हुई मौत में मोदी जी क्या करेंगे ? तो उनके लिए हम बताना चाहते हैं कि आप इस देश के प्रधानमंत्री हैं, देश के मुखिया । जब आप करेंगे तभी तो बदलेगा देश। या सिर्फ यह कहने से कि देश बदल रहा है देश बदल जाएगा।

एक और बात आपको बताऊं कि मैं इस लिए भी ज्यादा डरा हुआ हूं क्यूंकि हत्या के चंद घंटे के अंदर ही हत्यारे ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने यह भी कबूल कर लिया कि वो स्कूल के उसी बाथरूम हत्या कर रहा था जो उस मासूम के क्लासरुम से महज तीन कदम पर था, सिर्फ एक दीवार के बाद। पुलिस ने मीडियो को वो चाकू भी दिखा दी जिससे उसने मासूम का गला लगभग अलग कर दिया, खून के फव्वारे दीवार तक फैल गए लेकिन उस हत्यारे के कपड़ों पर छींटा तक नहीं पड़ा, अगर पड़ा तो वो कपड़ा कहां है। मैं डरा हुआ हूं क्यूंकि पुलिस ने बहुत जल्दी में हत्यारे को पकड़ लिया और उसका कबूलनामा भी करवा दिया जिससे शक पैदा होता है औऱ डर बढ़ जाता है। आनन फानन में स्कूल की प्रिंसिपल को निलंबित करके खानापूर्ति करने की कोशिश की जाती है लेकिन हत्या की असली वजह को दबाने का प्रयास जारी है। इसलिए डर और बढ़ रहा है।

मैं स्कूलों में हुए अपराध की गिनती नहीं कराना चाहता लिहाजा प्रद्युम्न की हत्या को आप एक नजीर के तौर पर मानिए। आप जरा गौर से समझिए इस बात को,  यही बच्चे तो भविष्य हैं इस हिंदुस्तान का। अगर इनकी जान इस तरह से जाती रही जिसमें इनके परिवार की जान बसती है, तो कल को आपके मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया के कर्णधार कौन होंगे। आप तो झोला उठाकर चल देंगे लेकिन ये कहां जाएँगे और क्या ऐसे ही अपनी जान गंवाते रहेंगे।

आपके लिए यह मौका है, ये बच्चे रहेंगे तो इनका भविष्य बनेगा और जब इनका भविष्य बनेगा तब देश बचेगा, तब देश बदलेगा। इसलिए हे प्रधानमंत्री जी हमें इस डर से बाहर निकालिए और इसके लिए आपको भी डरना होगा। आप भी डरिए क्योंकि डर के आगे ही जीत है।

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