नई दिल्ली। मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में नीतीश कुमार सरकार की मंत्री मंजू वर्मा को आखिरकार अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। उनकी कुर्सी उनके पति के इस मामले में संलिप्त होने की वजह से गई, लेकिन
पटना के स्टैंड रोड पर स्थित बंगला नंबर 6 चर्चा में फिर से आ गया। दरअसल ये बंगला वहीं है जो नीतीश सरकार के समाज कल्याणा मंत्री मंजू वर्मा के नाम पर आवंजिट था। ये बंगला मंजू वर्मा के लिए मनहूस साबित हुआ। दरअसल इस बंगले में जो भी मंत्री रहा वो अपना कार्य काल पूरा नहीं कर पाया है। इस शिकारी बंगले की शिकारों की लिस्ट में मंजू वर्मा का नाम भी शामिल हो गया। पिछले तीन मंत्रियों के साथ भी ऐसा ही हुआ।

शिकारी बंगले की शिकार बनीं मंजू वर्मा

स्टैंड रोड पर स्थित बंगला नंबर 6 का इतिहास कहता है कि जिस भी मंत्री के नाम पर ये सरकारी बंगला आवंटित हुआ वो मंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। इस बंगले में रहने वाले मंत्रियों को अपना कार्यकाल पूरा होने से
पहले ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। पिछले कुछ घंटों से यह चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, यह बंगला नीतीश कुमार सरकार की समाज कल्याण विभाग की मंत्री मंजू वर्मा के नाम पर आवंटित था , लेकिन उनके पति पर मुजफ्फरपुर कांड के मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर से संबंध होने के कारण मंजू वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

आखिर सवाल ये कि बंगला नंबर 6 में इतनी मनहूसियत क्यों?

स्टैंड रोड पर स्थित बंगला नंबर 6 के मनहूसियत के पीछे का कारण उसका इतिहास है। पिछले कुछ वर्षों से इस बंगले को जिस भी मंत्री को आवंटित किया जाता है , वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता है । ये बंगला पहले तीन मंत्रियों को आवंटित किया गया था, संयोग की बात है कि ये तीनों मंत्री कुशवाहा जाति के ही हैं, इन तीनों को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अपना पद छोड़ना पड़ा ।

सबसे पहले जदयू नेता और उत्पाद विभाग के मंत्री अवधेश कुशवाहा का नाम पर इस बंगले को आवंटित किया गया, जो 2010 में मंत्री बने लेकिन अक्टूबर 2015 में घूस लेने के आरोप के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

इसके बाद 2015 के विधान सभा चुनाव में महागठबंधन की सरकार से आरजेडी के आलोक मेहता सहकारिता मंत्री बने और उन्हें भी बंगला नंबर 6 आवंटित किया गया। 18 महीनें ही महागठबधंन की सरकार रही , जिसके कारण आलोक
मेहता को अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ा। आलोक मेहता अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये , वो भी कुशवाहा जाति से आते हैं ।

पिछले साल प्रदेश में जदयू -भाजपा की सरकार बनी, जिसमें नीतीश के कैबिनेट में मंजू वर्मा को समाज कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया और उन्हें भी बंगला नबंर 6 आवंटित किया गया। नतीजा वहीं। मुजफ्फरपुर कांड की वजह से मंजू वर्मा को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और ये बंग ला एक बार फिर से शिकारी बंगला साबित हो गया।

क्या है पूरा मामला

मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार मामले में समाज कल्याण विभाग की मंत्री मंजू वर्मा को इस्तीफा देना पड़ा। मंजू वर्मा ने अपना इस्तीफा तब दिया जब मुजफ्फरपुर कांड के मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर ने उनके पति चंदेश्वर वर्मा के साथ संबंधों की बात कबूली। वहीं जब मुजफ्फरपुर कांड की जांच कर रही सीबीआई के सूत्रों से इसका खुलासा हुआ कि जनवरी से मई के बीच में बृजेश ठाकुर ने मंत्री के पति चंदेश्वर वर्मा के साथ 17 दफा फोन पर बात की, तब जाकर मंजू वर्मा पर इस्तीफे का दवाब  काफी बढ़ गया। वहीं सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान पाया कि पिछले कुछ महीनों में चंदेश्वर वर्मा 9 बार उस बालिका गृह में गया जहां 34 लड़कियों के साथ बलात्कार हुआ है।विपक्ष के हमलों से  नीतीश सरकार घिर चुकी थी। राजद नेता तेजस्वी यादव दिल्ली तक पहुंच गए। ऐसे में हारकर नीतीश कुमार को अपने मंत्री से इस्तीफा लेना  पड़ा।

नीतीश कुमार का भी हो नारको टेस्ट

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड ने  नीतीश सरकार को हिलाकर रख दिया। जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले में अपने मंत्रियों का बचाव करते रहे, उससे उनपर भी सवाल उठने लगे। मंजू वर्मा के पति और  मामले  के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के बीच संबंधों के खुलासे  के बावजूद नीतीश कुमार ने मंजू वर्मा का बचाव किया। लेकिन जब कोर्ट में पेशी के दौरान ब्रजेश ठाकुर ने मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा से फोन पर हुई बातचीत को स्वीकारा तब जाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंजू वर्मा को बुलाकर इस्तीफा लेना पड़ा। नीतीश ने कार्रवाई तो की, लेकिन अपने स्वाभाव के अनुरूप नहीं बल्कि इसमें देरी की गई। जिसकी वजह से विपक्ष लगातार आक्रामक होता रहा। कांग्रेस ने इसे विपक्ष के दबाव में उठाया गया कदम बताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग कर दी है। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता बीरेंद्र ने तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का नारको टेस्ट कराए जाने की मांग तक कर डाली। वहीं तेजस्वी ने  मामले को दिल्ली तक पहुंचा गया। लोकसभा चुनाव से  पहले इस मामले में नीतीश सरकार के रवैये से उनकी मुश्किल बढ़नी तय मानी जा रही है ।

 

 

 

 

 

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