6 दिसंबर 1992 को जो हुआ उसने भारतीय राजनीति को हमेशा-हमेशा के लिए बदल दिया। अयोध्या में लाखों की संख्या में कारसेवकों ने महज 5 घंटे में बाबरी मस्जिद को गिराकर नए विवाद को जन्म दे दिया, जिसके बाद देशभर में सांप्रेदायिक दंगे हुए। 1992 में अयोध्या में जो हुआ, उसकी नींव 1990 में बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा में रखी गई। रथयात्रा के दौरान बीजेपी नेता ने कमस खाई कि ‘कसम राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे’। ये नारा देशभर में गूंजने लगा। 2 सालों में इस नारे का रंग दिखने लगा और फिर 1992 में एक और नारे का तेजी से प्रचार किया जाने लगा। नारा था ‘एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो’ इसी नारे के साथ लाखों की तादात में कारसेवकों ने मस्जिद से भीतर घुसकर 5 घंटे के भीतर विवादित ढांचे को तोड़ दिया।26 साल पहले हुई इस घटना ने भारतीय राजनीति में नए विवाद को जन्म दे दिया। बाबरी मस्जिद विध्वंस के घटनाक्रम पर एक नजर डालते हैं।

6 दिसंबर 1992 की सुबह तक करीब साढ़े 10 बजे लाखों की संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंच गए थे। नवंबर से ही देशभर से कारसेवक अयोध्या पहुंचने लगे थे। अयोध्या में कार सेवकों की भीड़ उन्मादी हो चुकी थी। चारों ओर डर का माहौल था। वहां विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल, कारसेवकों के साथ वहां मौजूद थे। फिर बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी भी पहुंचे। उस वक्त बीजेपी के बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी भी पहुंच गए। प्रदेश की पूर्व मुख्य़मंत्री उमा भारती ने तीन दिनों से अयोध्या में डेरा जमा रखा था।

सैकड़ों कारसेवक मणिराम छावनी में धड़धड़ाते हुए घुस गए। वहां दो धार्मिक नेताओं महंत रामचंद्र परमहंस और महंत नृत्यगोपाल दास को गुस्से से खौलते सवालों की बौछारों का निशाना बनाया जा रहा था। फिर बीजेपी नेताओं की अगुवाई में कारसेवकों की भीड़ बाबरी मस्जिद की तरफ बढ़ रही थी। पहली कोशिश में पुलिस उन्हें रोकने में कामियाब हो गई, लेकिन ये कामियाबी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। अचानक दोपहर में 12 बजे के करीब कारसेवकों का एक बड़ा जत्था मस्जिद की दीवार पर चढ़ने लगा। लाखों कारसेवक मस्जिद पर टूट पड़े और कुछ ही देर में मस्जिद को कब्जे में ले लिया। उग्र भीड़ को देखकर पुलिस की हिम्मत भी पस्त हो गई। पुलिस के आला अधिकारी मामले की गंभीरता को समझ रहे थे, लेकिन वो वहां जानकर कारसेवकों को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। दोपहर के 3 बजे के करीब कारसेवकों ने पहला गुंबद तोड़ दिया और 5 बजने में 5 मिनट पहले ही पूरा का पूरा विवादित ढांचा जमींदोज कर दिया। जय श्री काम के नारे से अयोध्या गूंज उठा।

कारसेवकों ने उसी जगह पूजा अर्चना की और राम शिला की स्थापना कर दी। जिसके बाद देशभर में सांप्रदायिक दंगे हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

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