नई दिल्ली। पत्रकारिता निष्पक्षता का नाम है। बिना किसी एक तरफ झुके खबरों के साथ न्याय करना ही मीडिया का अस ली काम है, लेकिन समय के साथ पत्रकारिता व्यवसाय में बदलती चली गई और अब ये निष्पक्षता से दूर होती जा रही है। टीआरपी, विज्ञापन, पेज व्यू जैसी चीजों ने मीडिया को व्यवसाय ब ना दिया है। खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना, नकारात्मक खबरों को तव्वजो देना ट्रेंड बनता जा रहा है, लेकिन इस सिक्के के दूसरे पहलू को भी देखना हमारा काम है। केवल निगेटिव खबरें छापना पत्रकारिता नहीं। अगर विदेशी महिला के साथ बदसलूकी हो जाए तो टीवी से लेकर हर अखबार इसे प्रमुखता देता है, लेकिन जेपी भाउसर ने जो किया उसे किसी ने सहारा तक नहीं। आइए जाने जेपी भाउसर के बारे में जिन्होंने छोटी पहल से बड़ी सीख दी है। विदेशों में भारत की तस्वीर  बदली है।

तस्वीर श्री जेपी भाउसर की है जो इंडियन आर्मी से जुड़ी ऑर्डनेंस ब्रांच दिल्ली में कार्यरत हैं। घर से निकले जेपी ने जब दिल्ली मेट्रो में कदम रखा तो कोने पर उन्हें रुपयों से लदा एक पर्स दिखाई दिया। थोड़ा और खंगाला तो उसमें कई क्रेडिट कार्ड भी मौजूद थे। लेकिन जेपी उस लावारिस पर्स में कुछ और ही ढूंढ रहे थे जो थोड़ी देर खंगालने के बाद उन्हें पर्स में उस  व्यक्ति का प ता मिल लगा, लेकिन वो एक कोरियाई पर्ययक था। जेपी ऑफिस के लिए लेट हो रहे थे, लेकिन फिर उन्होंने फैसला किया कि वो ऑफिस से छुट्टी कर पहले पर्स के मालिक के पास उसकी अमानत पहुंचाएंगे।

पर्स में मौजूद आईडी कार्ड की मदद से उन्होंने उस व्यक्ति तक पहुंचने का फैसला किया. काफी मुश्किल से उन्हें उसका नंब र  मिला। उसे फोन मिलाया तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा । जेपी ने उसे बुलाया और उसे उसका पर्स थमा दिया। पर्यटक ने उन्हें कुछ पैसे देने की कोशिश की, लेकिन जेपी ने इंकार करते हुए लिखा कि “Welcome to India” ।

खबर खास इसलिए है क्योंकि विदेशी महिलाओं के साथ बदसलूकी की खबरें तो हर कोई चापता है, लेकिन किसी  ने जेपी के काम की सराहना नहीं की। उल्लेखनीय है के जेपी इतना महान कार्य करने के बाद भी किसी वाहवाही के इच्छुक नहीं थे। कोरियाई टूरिस्ट के आग्रह पर जेपी ने यह तस्वीर खिंचवाई जो वायरल हो गयी। जेपी भी एक सामान्य हिंदुस्तानी हैं। सिक्के का दूसरा पहलू जेपी जैसे नागरिकों को देख कर समझ आता है। जेपी ने जो किया वह भी हमारा चरित्र है । उस पर रोशनी डालनी होगी।

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