प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की । पीएम ने देश को साफ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत की शुरुआत की गई। लाखों-करोड़ों खर्च किए गए,लेकिन स्वच्छ भारत का दायरा मंत्रियों के निवास स्थान के आसपास तक की सीमित रह गया। हमने स्वच्छ भारत की तस्वीर लोगों के सामने रखने की कोशिश की तो सोशल मीडिया पर उसे आपत्तिजनक कंटेंट मानकर बैन कर दिया गया। तस्वीरें सच्चाई बयां करने वाली हैं। इन तस्वीरों में न तो किसी तरह का एडिटिंग की गई है और न ही कोई स्पेशल इफेक्ट डाला गया है। तस्वीरें उतनी ही सच्ची है जितनी इनकी हकीकत। मोतिहारी शहर की इन तस्वीरों ने सरकारी दावों की पोल खोल दी। शहर को नेशनल हाईवे से जोड़ने वाले इस रास्ते पर कूड़े का अंबार लगा है।
 
सड़क के दोनों तरफ गंदगी और कूड़े की ढ़ेर लगी है। उस सड़क से गुजरना आसान नहीं है। दुर्गंध ऐसी की सांस लेना मुश्किल है। गंदगी के बीच से गुजरने पर लगता है मानों नर्क से गुजरना पड़ रहा हो। हैरानी तो इस बात की होती है कि जहां पर गंदगी का अंबार लगा है वो इलाका शहर का पॉश इलाके के तौर पर जाना जाता है। शहर के नामी लोग इस इलाके में रहते है। ऐसे में इस इलाके का ये हाल देखकर हैरानी होती है, लेकिन लोग भी इस गंदगी के आदी हो गए हैं।

10 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्वी चंपारण जाने वाले हैं। ऐसे में मोतिहारी शहर में फैली इस गंदगी पीएम के स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई उनके सामने ला देगी। जब इस तस्वीर को वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा ने ट्विटर के जरिए लोगों के सामने रखी तो ट्विटर ने उसे आपत्तिजनक पोस्ट मानते हुए ब्लॉक कर दिया। देशभर के पत्रकारों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। लोग पत्रकार अनुरजंन झा के साहत की प्रशंसा कर रहे हैं वहीं ट्विटर पत्रकारों की आलोचना की केंद्र में आ गयाहै।

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