पटना। राजधानी पटना से 70 किमी की दूरी पर स्थित मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रम गृह में जो हुआ उसने न केवल बिहार बल्कि देश को शर्म से भर दिया। इस मामले में जिस तरह से राजनीतिक सांठ-गांठ के मामले सामने आ रहे हैं उससे साफ है कि सत्ता के गुरूर में लोग ये भी भूल जाते हैं कि उनकी ये गलती किसी के जिंदगी को खत्म कर सकती है। मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 बच्चियों के साथ रेप मामले में सीबीआई एक के बाद एक परत खोल रही है। मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इस कांड ने विपक्ष को बड़ा मौका दे दिया है सुशासन बाबू को घेरने का। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी उनके लिए बड़ा खतरा बन गई है। इस मामले के उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुरी तरह घिर गए हैं। पहले तो नीतीश कुमार चुप्‍पी साधे रहे, जब तक उन्‍होंने सक्रियता दिखाई, तब तक तेजस्‍वी यादव ने बिहार से लेकर दिल्‍ली तक सवालों की झड़ी लगा दी। विपक्ष ने पटना से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक नीतीश कुमार के लिए सवालों के जाल बिछा दिए।

सवाल के  बदले स वाल पूछ रहे  हैं नीतीश

अब नीतीश कुमार के पास कोसने के अलावा कुछ बचा नहीं है। इस कांड के बाद सरकार की कार्यनीति और उनके रवैये पर सवाल उठा तो नीतीश कुमार मीडिया और तेजस्‍वी दोनों को कोसने लगे। जब पत्रकारों ने नीतीश कुमार से छवि पर सवाल पूछ लिया उन्‍होंने कहा- आपकी छवि पर क्या असर पड़ा, आप भी तो बिहारी हो? सवाल का जवाब देने के बजाए नी तीश सवाल के बदले सवाल कर रहे हैं। पत्रकारों ने भी समझ लिया कि जब सवाल के बदले सवाल आने लगे तो समझ जाना चाहिए कि अब सुशासन बाबू के पास जवाब बचे नहीं है।

सरकार की छवि को लगा गहरा धक्का,नीतीश के नाक के नीचे भयानक कांड

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 बच्चियों के साथ रेप मामले का मामला सामने आया। कांड के मुख्य आरोपियों के तार नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से जुड़ा। जेडीयू मंत्री मंजू वर्मा समाज कल्‍याण मंत्री हैं और आरोप है कि उनके पति चंद्रशेखर वर्मा का अक्सर बालिका गृह में आना जाना लगा रहता था। ऐसे में जेडीयू मंत्री भी सवालों के घेरे में हैं। बिहार के वरिष्‍ठ बीजेपी नेता सीपी ठाकुर जहां मंजू वर्मा का इस्‍तीफा मांग रहे हैं तो वहीं डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी उनका बचाव कर रहे हैं।

विपक्ष ने दिखाई ऐसी तत्परता कि नीतीश के छूट गए पसीने

इस कांड के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव ने मौका का सही फायदा उठाया और बिहार से लेकर दिल्ली तक नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तेजस्वी के साथ कई विपक्षी पार्टियां साथ आ गई, जिसे देखकर नीतीश कुमार झल्ला उठे हैं। तेजस्वी की राजनीतिक तत्पर्ता देखकर नीतीश को न चुप रहते बन रहा है और न ही बोलने के लिए कुछ बचा है। बस आरोप लगाना बाकी था सो उन्होंने कर दिया। दिल्ली के जंतर- मंतर पर इस कांड के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर सवाल खड़ा करते हुए नीतीश ने आरोप लगाया कि विपक्षी प्रदर्शन के दौरान हंस रहे थे, यह कैसी संवेदनशीलता है? लेकिन जब नीतीश कुमार से बिहार पुलिस की जांच के बारे में पूछा गया तो सवाल गोल कर गए। वहीं सीबीआई ने मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश सिंह के तीनों मोबाइल फोन्स की डिटेल निकाल ली है। इस कॉल डिटेल में कुछ ऐसे सफेदपोश लोगों के नाम शामिल हो सकते हैं,जिनका नाम सामने आने पर नीतीश कुमार की मुश्किलें और बढ़ सकती है।

नीतीश की चुप्पी बढ़ाएगी उनकी मुश्किलें

मुजफ्फरपुर बालिका गृह माम ले में नीतीश कुमार की चुप्पी उनके लिए बड़ा घातक साबित हो सकती है। अपनी पार्टी ने लोगों के इस कांड में शामिल होने के आशंकाओं के चलते उन्होंने चुप्पी साध ली। मीडिया की रिपोर्टिंग पर ताना मार रहे हैं वो नेगेटिव फीड को पकड़कर चल रहे है। नीतीश कुमार ने इस मामले में 14 अधिकारियों को तो निलंबित कर दिया, लेकिन अपने आरोपी मंत्री का नाम तक नहीं ले रहे हैं। सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों से साठगांठ कर ब्रजेश सिंह नीतीश कुमार के नाक के नीचे इतना भयानक कांड करता रहा और मुख्यमंत्री को भनक तक नहीं लगी। ऐसा कैसे संभव हैं कि चंद किलोमीटर की दूरी पर बालिका गृह में बच्चियों के साथ हैवानियत होती रही है सरकार को भन क तक नहीं रही।

नीतीश के सुशासन छवि का क्या होगा?

नीतीश कुमार खुद को सुशासन बाबू कहते हैं। प्रदेश में अपराध को कंट्रोल करने का दावा करते हैं, लेकिन इस कांड ने नीतीश के सुशासन छवि को झटका दिया है। नीतीश सरकार के कार्यकाल में हुए इस घिनौने कांड ने बिहार की छवि फिर से भूमिल कर दी है। आज से पहले बिहार में इस तरह का कांड नहीं हुआ था, ऐसे में इस कांड और सरकार के र वैये का असर लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला

फरवरी 2018 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस यानी कि टिस टीम ने बिहार के बालिका आश्रय गृह पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को सौंपी, जिसके कहा कि बालिका गृह का रख रखाव सही नहीं है और रिपोर्ट में बच्चियों के साथ दुर्रव्यवहार की शिकायतें भी मिली थीं। जिस के बाद जुलाई 2018  में मामले की छानबीन की गई तो चौंकाने वाली बात सामने आई। बालिका गृह में रहने वाली 42 बच्चियों  में  से 34  बच्चियों के  साथ रेप की पुष्टि की गई। इस  मामले के सामने आने के  बाद हड़ंकप  मच गया।  मामले के मुख्य आरोपी समते 8  लोगों  को  गिरफ्तार किया गया। अलग-अलग जिले के 14 अधिकारी निलंबित कर दिए गए।  बिहार के साथ-साथ देशभर में  प्रदर्शन हुए और सरकार पर सीबीआई डांच  का दवाब बनाया गया।  सरकार को  इसकी सिफारिश करनी पड़ी। 

 

 

 

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