राज्यसभा में उपसभापति बनने के बाद एनडीए प्रत्याशी हरिवंश को सदन में सबने बधाई दी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
हरिवंश से जुडी कई किस्सों का जिक्र करते हुए बताया कि आज हम अगर पहाड़ चीरकर सड़क बनाने वाले दशरथ
मांझी को जानते हैं , तो उसका पूरा श्रेय हरिवंश को जाता है , क्योंकि उन्होंने ही अपने अखबार प्रभात खबर के द्वारा
उनकी कहानी बताई थी । हरिवंश ने बताया कि दशरथ मांझी , इंसानी जज्बे और जुनून की अनूठी मिसाल है ,जो
आगे आने वाली कई पीढियों को सबक सिखाती रहेगी ।

हरिवंश बलिया के मध्यमवर्गीय परिवार से हैं, उनका जन्म 1956 में हुआ , उन्होंने 1977 में टाइम्स आॅफ इंडिया से अपनी  पत्रकारिता की शुरूआत की ,उसके बाद 1989 में राॅची में प्रभात खबर में भी काम किया । हरिवंश 1990 में प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के एडीशनल मीडिया एडवाइजर रह चुके थे , प्रभात खबर की 25 वर्षों तक कमान संभाली उसके बाद वो 2014 में राज्यसभा के लिए नामांकित हुए।

क्या थी दशरथ मांझी की कहानी

बिहार के गहलोर गांव के दशरथ मांझी , जिन्होंने अपनी मेहनत की वजह से अपनी एक अलग पहचान बनाई । दशरथ
मांझी ने जीवन के संघर्ष काल में पत्नी की मौत के बाद यह निर्णय लिया कि वो गहलोर गांव के पहाड़ को चीरकर
सड़क बनाएगे । दरअसल दशरथ मांझी  की पत्नी गर्भवती थी। प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो अस्पताल ले जाने  के लिए दशरथ को अपनी गर्भवती पत्नी को अस्पताल पहुंचाने में काफी मुश्किलें  हुई। पहाड़ों की वजह से उनके गांव तक आने के लिए  कोई सड़क नहीं थी, जिसकी वजह से अस्पताल पहुंचने से पहले  ही उनकी पत्नीका देहांत हो गया, जिसके बाद मांझी ने तय किया कि वो अपने गांव तक सड़क को पहुंचाकर रहेंगे। अकेले  दम पर मांझी ने पहाड़ोंको  चीर कर सड़क बना दिया। मांझी ने 1960 से लेकर 1982 तक संघर्ष करके पहाड़को छेनी और हथौडी की मदद से 25 फीट ऊंची 30 फीट चौड़ी और 360 मीटर लंबी सड़क का निर्माण किया । उनके इस प्रयास को सम्मान देने के लिए मोदी ने अपने ‘ मन की बात ’ में युवाओं को उनसे प्रेरणा लेने की बात भी कही । केंद्र सरकार ने माउंटेनमैन के इस संघर्ष को सार्थक करने के लिए गांव तक रेल का विस्तार करने की हरी झंडी भी दे दी है । दशरथ मांझी ने 22 साल
संघर्ष करने के बाद पहाड़को चीरकर अतरी और वजीरगंज ब्लाॅक की दूरी कम कर दी है।

 

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