बिहार मंत्री ने बालिका-गृह काण्ड में दिया इस्तीफ़ा,विपक्ष संतुष्ट नहीं ,नितीश दे इस्तीफ़ा : तेजस्वी

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file photo

आखिरकार नितीश कुमार आये बैक फुट पर,पहले ही मंत्री को हटा देना चाहिए था

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण और स्वाधार गृह काण्ड के बाद बिहार के सी एम नितीश कुमार पर चारो तरफ से हमले हो रहे थे। विपक्ष तो हमलावर था ही साथ ही सहयोगी भाजपा के नेता भी इस मामले पर अब सरकार के खिलाफ खुल कर आ गए थे ऐसे में सुशाशन बाबू की परेशानी काफी बढ़ गयी थी। दूसरी तरफ बिहार में नितीश कुमार की छवि भी अब दागदार लगने लगी थी। खासकर जिसतरह नितीश कुमार ने पहले मंत्री मंजू वर्मा का खुलकर साथ दिया। कई कार्यक्रमों में अपने साथ हिस्सेदार बनाया लोगों के बीच काफी गलत सन्देश गया। इसके बाद दबाब में आकर नितीश कुमार ने सी बी आई जांच की अनुसंशा तो की लेकिन इसके बाबजूद विपक्ष इस्तीफे से नीचे कोई बात ही नहीं कर रहा था। बच्चियो से मिले फीडबैक और जांच में सी डी आर में ब्रजेश ठाकुर और मंत्री पति चंद्रशेखर वर्मा के बीच संबंधों का भी खुलासा हुआ. खासकर सी बी आई अब दोनों की दिल्ली यात्रा का भी डिटेल खंगालने में जब लग गयी तो चंद्रशेखर पर लगते आरोपों में सच्चाई भी दिखने लगी। ऐसे में नितीश कुमार के लिए मंजू वर्मा के इस्तीफे के अलावा कोई चारा नहीं था।
खासकर बिहार के मुजफ्फरपुर जिला के बालिका गृह में 34 लड़कियों के यौन शोषण मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर द्वारा समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा से फोन पर ‘राजनीतिक मुद्दों’ पर बातचीत होने की बात स्वीकार करने के कुछ ही घंटे के बाद आज मंजू वर्मा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय सूत्रों ने बताया कि मंजू वर्मा ने नीतीश कुमार से मुलाकात की और अपना इस्तीफा पत्र उन्हें सौंप दिया। अपने इस्तीफे के बाद मंजू वर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि मेरा पति बेकसूर है। अगर उनपर या मुझपर आरोप साबित हो जाता है तो किसी भी सजा के लिए तैयार हूँ,ऐसा मंजू वर्मा ने एक छोटे से प्रेस वक्तव्य में कहा।
अब जबकि बिहार में इस इस्तीफे के बाद कुछ सन्नाटा या शांति की उम्मीद की जा रही थी,लेकिन अब सियासी भूचाल और ज्यादा बढ़ गया है। अब विपक्ष और ज्यादा हमलावर हो गया है और नितीश कुमार पर इस्तीफे का दबाव बना रही है। पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी अब मुजफ्फरपुर मामले को और ज्यादा गहरा सियासी रंग देने की कोशिश कर रहे हैं और इस मुद्दे को चुनाव तक बनाये रखना चाहते हैं। अब देखना है कि इस हंगामे और दबाब के संकट से नितीश कुमार कैसे उबार पाते हैं और उनके सहयोगी अब कुछ नरम पड़ेंगे या फिर अभी भी नितीश पर वार करना जारी रखेंगे?

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