फाइनल मैच है वानखेड़े के मैदान में तो कांग्रेस की टीम पहुंचती है फिरोजशाह कोटला मैदान

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भाजपा घरेलु पिच पर जोरदार प्रैक्टिस में लगी ,दावा फॉलोऑन से हराएंगे

 

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की कार्यकारणी की बैठक और 2019 के संग्राम में सेनापतियों की जिम्मेवारी तय करने में लगे उनके चाणक्य शाह ने दावा  किया है कि आनेवाले चुनाव में कोई सामने आकर पूरी इनिंग भी नहीं खेल पायेगा और हम 2014 का भी रिकॉर्ड तोड़ेंगे। इस बीच कांग्रेस भी तैयारी में आने की कोशिश करती दिख रही है और काफी हद तक वार्मअप होकर कड़ी टक्कर देने को तैयार दिख रही है। लेकिन सवाल ये उठता है कि कांग्रेस के रणनीतिकार केवल विरोधी टीम को ही देख रहे है ,वो ये नहीं देखते कि आखिर मुकाबला कहाँ और कैसे होनी है। अब जहाँ भाजपा देश के सिंहासन की लड़ाई में देश के अलग अलग हिस्सों सहित दिल्ली में कसरत जारी रखकर देश को ही अपना घरेलू पिच बनाकर मैच में हावी होने की कोशिश में लगी है तो कांग्रेस के जेनेरल आनेवाले दिनों में दुबई जाकर कुछ करने की योजना बना चुके हैं।  ये तो वही हुआ ना ,मैच है वानखेड़े में और टीम भेज रहे कोटला। अब बोलिये क्या होगा मुकाबला ? नॉकऑउट किसे मिलेगा ?
विपक्षी महागठबंधन को झूठ  पर आधारित गठबंधन करार देते हुए भाजपा अध्यक्ष ने  कहा कि भाजपा ‘मेकिंग इंडिया’ में लगी है तो कांग्रेस ‘ब्रेकिंग इंडिया’ में जुटी है। राष्ट्रीय कार्यकारणी के पहले दिन की बैठक समाप्त होने के बाद पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा  कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने भाषण में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लायी गयी जन-कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तृत चर्चा की।  शाह ने अपने भाषण में महागठबंधन को झूठ पर आधारित गठबंधन बताया और कार्यकर्ताओं से अपील कि इसका सच देश की जनता तक ले जाएं।अमित शाह ने कहा, ‘‘ सभी कार्यकर्ता सरकार के अच्छे कामों को लोगों के सामने ले कर आएं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘एक तरफ जहां भाजपा ‘मेकिंग इंडिया’ में लगी है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ‘ब्रेकिंग इंडिया’ में लगी है।’’ उन्होंने कहा कि हम इस तरह से राष्ट्रीय नागरिक पंजी. का कार्यान्वयन करेंगे कि एक भी नया घुसपैठिया भारत में नहीं आ सकेगा। शाह ने कहा कि 2019 का चुनाव मोदी सरकार की उपलब्धियों और हमारे संगठन की शक्ति के आधार पर लड़ा जायेगा। बैठक में केरल और देश के अन्य हिस्सों में आयी बाढ़ पर विस्तृत चर्चा की और सभी से राहत कार्यों में जुड़ें रहने की अपील की। दरअसल भाजपा की टीम सारी  रणनीति जमीन पर खासकर जनता की जमीन पर तैयार करने का दावा  करती है और अपनी फ़ौज यानि कि कार्यकर्ताओं को शाबाशी के साथ जिम्मेवारी सँभालने  की चुनौती भी देती है। ये प्रवृति कहीं भी कांग्रेस खेमे या नेतृत्व में नहीं दिखती।
   

भाजपा की टीम जब भी कही किसी मिशन पर बैठती है तो  भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत पार्टी के अमूमन नेता अपनी भागीदारी निभाते दिखते हैं। जबकि कांग्रेस में इसका नितांत ही अभाव दिखता  है। कभी काँग्रेस एन आर सी या 3 तलाक जैसे मुद्दे पर अपना एक रुख नहीं तय कर पायी, देश के अलग-अलग हिस्सों को समझ कोई अभीयान नहीं चला पायी . महिला आरक्षण काँग्रेस के समझ से परे रहा ।नीति न तो हिन्दू रही न ही इस्लाम। टोपी और जनेऊ की हेरफेर में खुद को बीचवाला बनाकर रख दिया।

दूसरी तरफ शाह ये भी दावा करते हैं कि अगले वर्ष होने वाले चुनाव में पार्टी 2014 से भी अधिक बहुमत से सरकार बनायेगी।  तो वहीँ कांग्रेस अभी इसी उहापोह में फांसी है कि गठवन्धन की रूप रेखा और नेतृत्व क्या होगा ? एक तरफ जहाँ शाह को पूरा  विश्वास है कि  संकल्प की शक्ति को कोई पराजित नहीं कर सकता है। वहीँ कांग्रेस के लोग ये भी कहते हैं कि पोस्ट पोल स्ट्रेटेजी भी काम करेगी। भाजपा  ‘‘अजेय भाजपा’’ के नारे को अभी से दुहराते हुए रणक्षेत्र में कूच कर चुकी है तो कांग्रेस अभी बन्दूक और कारतूस के ही इन्तेज़ामात में लगी है ।

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अब जरा ये तस्वीर देखिये , कांग्रेस अध्यक्ष  अक्टूबर में मिडिल ईस्ट के दौरे पर जाएंगे। वे तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही दो दिन के मिडिल ईस्ट दौरे पर जाएंगे। राहुल गांधी के दौरे का केन्द्र दुबई में होगा। इस दौरे को एतिहासिक बनाने के लिए कांग्रेस ने पूरी तैयारी कर ली है। राहुल के दुबई दौरे के लिए बकायदा एक स्टेडियम बुक कराने की कोशिश की जा रही है जिसकी क्षमता 50 हजार लोगों के बैठने की होगी। लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर चुनाव के समय दुबई जाकर किस रणनीति को अमली जामा पहनाएंगे ?50 हजार लोगों से स्टेडियम को भरकर राहुल के इस दौरे को लोकप्रिय बनाने के लिए कांग्रेस पूरा जोर लगाएगी। दरअसल दुबई में करीब 34 लाख लोग ऐसे हैं जिनका नाता भारत से है। इस लिहाज से राहुल के दुबई दौरे की रुपरेखा तैयार की जा रही है। हम आपको बता दें कि राहुल का ये दौरा कांग्रेस ठीक उसी अंदाज में करने की कोशिश कर रही हैं जैसे चुनाव प्रचार के दौरान मोदी विदेशी दौरे करते हैं। लेकिन बात समझ नहीं आती कि मोदी की नक़ल काम आएगी क्या ?मोदी कहीं भी जाते हैं तो वो अपनी छवि एक पी एम को साथ लेकर जाते हैं ,कुछ दावा झूठ ही सही ,लेकर जाते हैं ,राहुल क्या लेकर जाएंगे ? अपनी असफलता ,कमजोर कमान ? या अपनी कमजोर मार्केटिंग ?

खैर हर टीम को अपनी रणनीति के हिसाब से मैच को खेलने का हक़ है पर कभी कभी अतीत और संभावनाओं का भी ख्याल कर लेना चाहिए ,नहीं तो बाद में ऐसा ना हो कि एक अनाड़ी और अदना भी ये ना कहने लगे कि सिफारिशी सेलेक्शन के दम पर चयनित कैप्टन उसी तरह बारहवां खिलाडी ना बनकर रह जाये जैसे कभी क्रिकेट के मैदान पर लालू पुत्र तेजस्वी का था।

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