प्रधानमंत्री मोदी जी,आप कब करेंगे जन-जन की बात?पूरे एक महीने का समाचार पढ़ डाला।

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PM MAN KI BAAT

आज फिर मोदी के मन की बात सुनी जन ने,जन की बात नहीं निकली मन से।

हर महीने मोदी के मन की बात की डायरी में एक पन्ना जुड़ता जा रहा है। आज 46 वा अध्याय जुड़ गया। यूँ तो हमारे देश के चौकीदार,अब भागीदार भी,हर बार ऐसी बात करने का दावा करते हैं जो देश की जनता के दिल के साथ जुड़ा होता है,पर इस बार कुछ ज्यादा ही मन की बात कर बैठे।
सावन का महीना है,पर पूरे देश ने इस महीने से से काफी पहले ही सावन देख लिया है। मुम्बई हो या केरल,गुजरात हो या बिहार पानी ने अपना कहर इस कदर बरपाया कि जून-जुलाई में ही सावन-भादो नजर आने लगा। अब इसपर अफ़सोस जताने से पानी-पानी हुयी जनता को शरद ऋतु का मुग़ल-गार्डन तो याद नहीं आएगा?प्रधानमंत्री जी केवल दिल्ली में ही आपकी सरकार नहीं है।अगर बाढ़ महाराष्ट्र में है या गुजरात में,सरकार आपकी ही है। बिहार हो या केरल वहां भी सरकार आपकी ही है।लगता है लोगों को लगेगा कि ये क्या गलत कह दिया गया?लेकिन यहाँ गलत क्या है?पी एम साहेब किसी राज्य में किसी विरोधी दल की ही सरकार है तो तकनीकी तौर पर पूरे देश पर तो राज आपका ही है ना?ऐसे में हार साल पूरा देश बाढ़ की विनाशलीला को झेलता है,फिर कोई ऐसी राष्ट्रीय नीति क्यों नहीं बनाते बाढ़ से बचने को? बाढ़ को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता पर बाढ़ से होनेवाली तबाही को कम तो किया जा सकता है। आपके ही शब्दों में,”इन दिनों बहुत से स्थान पर अच्छी वर्षा की खबरें आ रही हैं। कहीं-कहीं पर अधिक वर्षा के कारण चिन्ता की भी खबर आ रही है और कुछ स्थानों पर अभी भी लोग वर्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भारत की विशालता, विविधता, कभी-कभी वर्षा भी पसंद-नापसंद का रूप दिखा देती है, लेकिन हम वर्षा को क्या दोष दें, मनुष्य ही है जिसने प्रकृति से संघर्ष का रास्ता चुन लिया और उसी का नतीजा है कि कभी-कभी प्रकृति हम पर रूठ जाती है| इसीलिये हम सबका दायित्व बनता है कि हम प्रकृति प्रेमी बनें,हम प्रकृति के रक्षक बनें, हम प्रकृति के संवर्धक बनें, तो प्रकृतिदत्त जो चीजें हैं उसमें संतुलन अपने आप बना रहता है।” जी आपने कहा तो ठीक पर ये सब महज उपदेश की बाते हैं। इन्हे छोड़िये उपदेशकों और प्रवचनकर्ताओं के लिए आप महज कार्यपालक,वो भी समयानुकूल कार्यपालक बन जाएँ तो आपको भी वोट-भिक्षाटन के लिए बहुत ज्यादा मसक्कत नहीं करनी पड़ेगी।
थाईलैंड की चर्चा आपने की,अच्छा लगा पर महज प्रेरणा जगाने के लिए। अगर व्यवहारिकता की बात हो तो यहाँ तो घर के पीछे गड्ढे में डूबते बच्चे तक को बचाने की तकनीक अपने पास नहीं है। अच्छा होता इस तरह की दुर्घटनाओं से सीख लेते हुए कुछ तकनिकी तैयारी की कोई योजना बन जाती और उसकी जानकारी मन की बात में आप दे देते।
हर बार आप खेलों को भी अपने मन की बात का हिस्सा बनाते हैं,इस बार भी बनाया ,हिमा दास सहित एकता भान,सुन्दर सिंह और योगेश के हौसले को सराहा,अच्छा लगा। इसके साथ ही दो युवा आई टी प्रोफेशनल्स योगेश और रजनीश की चर्चा की,अब आपसे उम्मीद है उनके द्वारा तैयार ऐप को जरूरतमंदो तक पहुँचाने में आपकी और सरकार की खास भूमिका होगी।
हमारे वीर शहीदों और कर्णधारों को भी उनकी जन्म-पुण्य तिथि पर याद किया लाजिमी लगा। साथ ही आपने पंढरपुर यात्रा की बात की,जनता से एक बार वहां जाने की सलाह दी ,अच्छा लगा पर पी एम साहेब जिस देश में अभी तक अधिकांश माँ-बाप अपने बच्चों को दो जून की रोटी नहीं दे पाते,नौनिहालों को स्कूल तक नहीं पहुंचा पाते उनके लिए कोई भी धार्मिक आयोजन या पर्यटन में शरीक होना तो सपना ही होगा न?फिर ऐसा सपना क्यों दिखाते हैं पी एम साहेब? साहेब चर्चा ना करते तो बुरा नहीं लगता,पर सपना दिखा कर दिल को सोच भर लेने की टीस क्यों देते हो?
जो भी हो आप हमारे देश की जनता के माई-बाप हो,हो सकता है कुछ लोगों को नागवार लगे आपको माई-बाप मानने में पर इतना तो मानना ही होगा न कि सपने तो आप दिखा देते हैं ना?आखिर सपना दिखाने और देख लेने में क्या हर्ज है? वैसे पी एम साहेब देश इतनी तो तरक्की कर ही चुका है कि हरघर में टी वी और मोबाइल पर हर पल की खबर देख और सुन लेता है। ऐसे में आप पिछले एक महीने की सभी खबरे लेकर रेडियो पर आ जाते हो,वाकई अव्वल न्यूज रीडर साबित कर देते हो अपने आपको, हर महीने एक बार।शुक्रिया हमारे प्रधान-मंत्री जी।

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