निर्भया के दोषियों की फांसी की सजा बरकरार

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तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका ख़ारिज

दिल्ली की निर्भया के दोषियों की सजा को न्यायलय ने ये कहते हुए कायम रखा है कि इस मामले में कोई पुनर्विचार का आधार नहीं बनता। इस लिए तीनो की याचिका ख़ारिज कर दी गयी। गौरतलब है कि मई महीने में ही सुनवाई पूरी हो गयी थी और फैसला को सुरक्षित रख लिया गया था। अब जाकर न्यायलय ने इस मामले में स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी वारदात के लिए फांसी की ही सजा जायज है क्योंकि देश के लिए ये घटना दिल दहला देनेवाली थी। मामले के एक और आरोपी अक्षय ने पुनर्विचार याचिका नहीं दायर की थी। पवन गुप्ता,मुकेश सिंह और विनय शर्मा ने पुनर्विचार याचिका डाला था जिसपर न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए पूर्व में तय किये गए सजा को बरक़रार रखा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भया के माता-पिता ने संतोष जताया और कहा कि इससे देश के लोगों में एक उम्मीद जगी है और निर्भया जैसी कई बेटियों को न्याय मिल पायेगा इसकी उम्मीद भी बढ़ी है और इस तरह के जघन्य अपराध में कमी भी आएगी।
ज्ञात हो कि दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात एक चलती बस में पैरा-मेडिकल की एक छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ। उसे और उसके साथी से बुरी तरह हिंसा भी हुई। अपराधी उन्हें महिपालपुर में घायल छोड़कर भाग निकले। मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया। कुछ दिनों बाद लड़की की मौत हो गई। इस बीच मामले के आरोपियों को पकड़ लिया गया। राम सिंह, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और एक नाबालिग को गिरफ्तार किया गया।
मुख्य आरोपी राम सिंह ने कुछ दिन बाद जेल में ही कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। नाबालिग अपराधी को जुवेनाइल कोर्ट से तीन साल की सजा सुनाई गई। बाकी चार आरोपियों पर मुकदमा चला और पहले ट्रायल कोर्ट और फिर हाई कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी पुनर्विचार याचिका को ये कहते हुए निरस्त कर दिया कि किसी विन्दु पर दोषियों के पास कोई आधार नहीं था जो उनके पक्ष में जा रहा हो,न ही पूर्व के निर्णय या विचार में कोई खामी थी,इसलिए फांसी की सजा ही इस तरह के मामलों के लिए उचित सजा है।

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