नई दिल्ली। दिल्ली पानी की किल्लत, बिजली कटौती, भीषण प्रदूषण से बेहाल है। दिल्लीवासियों का सांस लेना का दूभर हो चुका है,लेकिन दिल्ली के मुखिया जनता को धरने पर बैठे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले 8 दिनों से उप-राज्यपाल अनिल बैजल के दफ्तर में धरने पर बैठे है। एलजी और सीएम की लड़ाई अब कोर्ट तक पहुंच चुकी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल के धरने पर आज सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एलजी के दफ्तर में धरने की अनुमति किसने दी? हाईकोर्ट ने सवाल किया कि किसी के घर में जबरन अंदर बैठकर धरना कैसे दे सकते हैं?

दरअसल अरविंद केजरीवाल एलजी कार्यालय में धरने पर बैठे हैं, जिसके खिलाफ बीजेपी के नेता विजेंद्र गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अपनी मांगों को लेकर लगातार आठवें दिन अरविंद केजरीवाल और उनके कैबिनेट सहयोगी धरना दे रहे हैं। वहीं उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन भूख हड़ताल पर हैं। भूख हड़ताल पर होने के बावजूद सतेंद्र जैन के वजन में 1.2 किलो की बढ़ोतरी हुई, फिर अगले दिन अचानक उनकी तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बिना इजाजत आप का विरोध प्रदर्शन

रविवार को आम आदमी पार्टी ने राजधानी में विरोध प्रदर्शन किया और रविवार शाम चार बजे नई दिल्ली के मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन से प्रधानमंत्री आवास की तरफ जुलूस शुरू निकाला, हालांकि उन्हें संसद मार्ग से आगे नहीं बढ़ने दिया गया। पुलिस ने बल प्रयोग कर जुलूस को जंतर मंतर की ओर मोड़ दिया। ये विरोध प्रदर्शन बिना पुलिस के इजाजत के ही की गई थी। वहीं इस धरना प्रदर्शन में केजरीवाल को पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्री समर्थन कर चुके हैं।

केजरीवाल का दावा गलत

आपको बता दें कि केजरीवाल ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर तंज कसा था कि आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म करवा दे, लेकिन आईएएस असोसिएशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल के दावे को गलत बताते हुए कहा कि सभी विभाग के अधिकारी काम कर रहे हैं।

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