ये दो तस्वीरें इस दौर की व्याख्या की सबसे सटीक तस्वीरें हो सकतीं हैं। भीड़ के हाथों मारे गए सुबोध सिंह की विधवा का पति के शव पर विलाप और हत्यारी भीड़ का स्वागत करता एक केंद्रीय मंत्री। दोनों तस्वीरें भले ही अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी हैं लेकिन जुड़ी एक ही विचारधारा से हैं। झारखंड के रामगढ़ में झूठी अफवाह फैलाकर भीड़ ने एक मुस्लिम युवक की हत्या की। हत्या का वीडियो वायरल हुआ और पहचान के आधार पर गिरफ्तार लोगों में से 8 लोगों को निचली अदालत ने हत्या का दोषी पाया। ऊपरी अदालत में सरकार की कमजोर पैरवी की वजह से सबको ज़मानत मिल गई। ज़मानत मिलते ही इस हत्यारी भीड़ को केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के आवास पर बुलाया गया और वहां खुद जयंत सिन्हा ने सबके गले में माला डाली। सरकार के मंत्री ने सबके सामने सरकार की मंशा जाहिर कर दी। मतलब ये कि हिंदुवाद के नाम पर हत्या करने वाली हर भीड़ के स्वागत में सरकार बिछी हुई है। इस घटना ने देश के सबसे बड़े सियासी दल बीजेपी की मंशा को भी स्पष्ट कर दिया। पार्टी हर उस शख्स के साथ है जो हिंदुवाद के नाम पर लाशें बिछा रहा है।
तो अब दूसरी तस्वीर पर गौर कीजिए। ये सुबोध सिंह की पत्नी हैं। इंस्पेक्टर सुबोध सिंह भी हिंदू थे और उनकी पत्नी भी हिंदू हैं। कथित हिंदू धर्म रक्षकों ने बुलंदशहर में हिंदू सुबोध सिंह को मारा और हिंदू महिला को विधवा कर हिंदू बच्चों को अनाथ किया। धार्मिक आतंतवाद का ये बम पिछले चार सालों से बारूद पाते-पाते अब इतना बेलगाम हो गया है कि किसी के भी सिर फट जा रहा है।
बुलंदशहर हिंसा मामले का मुख्य आरोपी योगेश राज भले ही इस घटना का मुख्य आरोपी है लेकिन सच ये है कि योगेश राज तो मोहरा भर है। योगेश जैसे लाखों नवजवानों के दिमाग में इतना जहर भर दिया गया है वो नवजवान बस अब किसी को डंस लेना चाहते हैं। ये जहर भरने वाले कौन हैं ये सबको मालूम है लेकिन, वो कभी मुख्य आरोपी नहीं बनाए जाते।
जिस सुमित की मौत हिंसा के दौरान हुई गोलीबारी में हुई उस सुमित के हाथ में पत्थर जिसने थमाया वो कौन है ये हम सब जानते हैं। वो कौन है जो ड़क्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर, टीचर, डीएम, क्लर्क, पत्रकार बन सकने वाले नवजवानों को दंगाई बनाना चाहता है ? वो कौन है जो आम समाज के बच्चों की मौत पर सत्ता की सीढियां चढ़ना चाहता है ? वो कौन है जो पहले आपको बच्चों का मरवाता है और फिर मुआवजे का ढोंग कर आपका शुभचिंतक भी बन जाता है ? वो कौन है जो अपने बच्चों को तो अच्छे स्कूलों में पढ़ाता है लेकिन आपके बच्चों को दंगाई बनाता है ? वौ कौन है…वौ कौन है..वो कौन? जानते तो सब हैं लेकिन बताए कौन ?
इस किस्म के तमाम मामलों की तरह योगेश अब कुछ दिनों के लिए भागा फिरेगा, फिर जेल जाएगा। ट्रायल चलेगा। मुकदमा कमजोर करने के लिए उसके परिजन वैसे ही किसी नेता के पैरों पर गिरेंगे जैसे नेताओं ने उसके दिमाग में जहर भर उसे दंगाई बनाया। फिर वही नेता केस कमजोर करवाने के नाम पर योगेश के परिजनों से रुपये ऐंठेगा। योगेश के बाबूजी खेत गिरवी रखेंगे, माताजी गहने गिरवी रखेंगी और नेताजी कुछ दिनों के लिए कमाई का एक जरिया बना लेंगे। जेल से निकलते-निकलते योगेश इतना तबाह हो चुका होगा फिर वैसे ही किसी नेता के पैरों पर गिरे रहना उसकी मजबूरी हो जाएगी। क्योंकि योगेश और योगेश जैसे लोग तो मोहरा भर होते हैं।आपको भरमाने से उनका कारोबार चलता है
बस्तियां जलाने से उनका कारोबार चलता है
धर्म और मजहब बस धंधा है जिनकी खातिर
दंगे भड़काने से उनका कारोबार चलता है
….असित नाथ तिवारी….

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