जब भटका बेटा वापस घर लौटने लगे,अच्छा लगता है

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file photos

आतंक का रास्ता छोड़ एक और युवक ने घर वापसी की,
परिवार की अपील पर आतंक का रास्ता छोडा युवक ने।

फिर कश्मीर से एक अच्छी खबर आयी है। खबर है कि एक और राह से भटक आतंक की गोद में बैठा बेटा वापस अपनी माँ की गोद में लौट आया है। एक प्रकाश (छद्म नाम) ने आज कश्मीर की घाटी में हथियार को तौबा कर सुरक्षा बालों के सामने आत्मसमर्पण कर अपने परिवार में वापस लौट गया। कश्मीर जोन पुलिस के द्वारा किये गए ट्वीट में कहा गया है कि कम्युनिटी की मदद से एक और अपने परिवार से जुड़ गया है और हिंसा का रास्ता छोड़ चुका है। हलाकि जिस युवक ने घर लौटने का फैसला किया है उसका नाम और उसकी पहचान को गुप्त रखा गया है,और ये उसकी और परिवार की सुरक्षा को ख्याल में रख कर किया गया है।
Kashmir Zone Police
@KashmirPolice
With the help of community one more joins his family and shuns the path of violence.@JmuKmrPolice @HMOIndia @spvaid
9:49 AM – Jul 24, 2018
इसके पहले भी कश्मीर में कई युवकों ने हिंसा,हत्या और आतंक का रास्ता छोड़ा है। उन्होंने अपने परिवार को अपनाया है और अभी वो सभी मुख्यधारा में लौट कर खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं।इसी साल के जनवरी महीने में तीन युवकों ने घर वापसी की थी जिसके बारे में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्वीट कर उस समय जानकारी भी थी। पिछले एक साल में लगभग12 लोग हथियार और हिंसा को छोड़ वापस आ चुके हैं और अब परिवार और समाज की तरफ से की गयी अपील का असर भी पड़ने लगा है। बता दें कि पुलिस ने पिछले साल घोषणा की थी कि वह मुठभेड़ के दौरान भी स्थानीय आंतकवादियों के आत्मसमर्पण की पेशकश को मंजूर करेगी। घोषणा के बाद से कश्मीर में 12 से अधिक आंतकवादी हथियार छोड़ चुके हैं। अधिकतर आतंकवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने और घर लौटने की परिजनों की अपील पर आत्मसमर्पण किया है।
Shesh Paul Vaid

@spvaid
Another 3 young boys in valley came back home in response to the call of their families. God bless them.
11:12 PM – Jan 1, 2018
हलाकि इसके पहले पिछले साल सुरक्षा बलों ने एक और युवक जो आतंक की शरण में चला गया था उसे घेर लिया तो आत्मसमर्पण की अपील की थी।लेकिन युवक राजी नहीं हुआ। इसके बाद मुठभेड़ स्थल पर उसकी पत्नी दिलशाद को लाया गया पर उसने समर्पण नहीं किया.
दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के पदगामपोरा में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच 2017 में हुयी भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों द्वारा स्थानीय आतंकी को समर्पण करने का पूरा मौका दिया गया। उसकी ओर से लगातार की गई फायरिंग के बावजूद भी सुरक्षाबलों द्वारा समर्पण के लिए काफी कोशिश की गई। सेना प्रवक्ता के अनुसार सुबह एक आतंकी को ढेर कर दिया गया था।दूसरा आतंकी इस दौरान कुछ मकानों के बीच पनाह लिए बैठा रहा। पता चला कि वह मोहम्मद शफी नामक स्थानीय आतंकी है। इस पर उसकी पत्नी को मुठभेड़ स्थल तक लाया गया।पत्नी दिलशादा ने बार-बार लाउडस्पीकर पर समर्पण की गुहार लगाई। रोते बिलखते बच्चों के साथ पहुंची दिलशादा लगातार गुहार लगाती रही, लेकिन उसने एक न सुनी। जब वह समर्पण के लिए तैयार नहीं हुआ और सुरक्षाबलों पर फायरिंग करने लगा तो जवाबी कार्रवाई में ढेर कर दिया गया।
लेकिन इसके अलावा और भी मामले हैं जिसमे एक अच्छे फुटबॉलर माजीद पर भी अपील का असर पड़ा। मजीद की माँ ने कई बार सोशल मीडिया समेत हर तरीके से बेटे से घर लौटने की गुजारिश की और मजीद का सीना पसीजा और वो घर को लौट आया।
ऐसा ही मामला नवम्बर साल 2016 का था जब एक बेटा माता-पिता की अपील पर आत्मसमर्पण किया था। एक मां की भावुक अपील पर आतंकी बेटे का दिल पिघल गया और उसने समर्पण कर दिया। कश्मीरी युवक पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया था। बारामुला जिले के सोपोर के आंचलिक इलाके की घटना थी। खुफिया एजेंसियों ने एक मकान में आतंकी की मौजूदगी का संकेत दिया था। इसके बाद सेना ने इलाके की घेराबंदी की। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छिपे आतंकी की पहचान उमक खालिक मीर उर्फ समीर के तौर पर हुई। वह उत्तरी कश्मीर में तुज्जार का रहने वाला है। जब युवक को बाहर निकालने के प्रयास बेकार साबित हुए तो उसके माता-पिता द्वारा उसे समर्पण करने के लिए राजी करने का अनुरोध किया गया। युवक के माता-पिता का मकान पांच किलोमीटर दूर था। उसकी मां तुरंत राजी हो गई और उस जगह पर आई, जहां युवक छिपा था। उन्होंने बेटे को अपनी कसम दी क्योंकि सेना ने उन्हें आश्वासन दिया था कि युवक के समर्पण करने पर वे नरम रख अपनाएंगे।इसी तरह 7 जून 2017 को भी एक आतंकी दानिश ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का काम किया,जिसमे सेना ने उसे माफ़ भी कर दिया था।
कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर में दोनों ही चीजों का असर दिखने लगा है,एक तो घर-परिवार और समाज की गुजारिश तो दूसरी तरफ सेना की दो तरह की रणनीति, एक सख्ती और दूसरा एक मौका देना। और ख़ुशी की बात है कि आज दोनों ही स्तर पर आशाजनक अंजाम भी देखने को मिल रहा है। आज एक बेटा लौटा है तो कल भी कोई लौटेगा माँ-परिवार और देश की पुकार सुनकर।

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