जम्मू कश्मीर पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला बकरीद के मौके पर जब नमाज अदा करने मस्जिद पहुंते तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। जब फारुख मस्जिद पहुंचे तो लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की और विरोधप्रदर्शन किया। उन्हें श्रीनगर के हजरत बल मस्जिद में नमाज अदा करने गए लोगों ने उनका विरोध किया। उनके साथ धक्कामुक्की की गई। यहां तक कि उनपर जूते भी उछाले गए हैं। लेकिन इस दौरान फारूक चुपचाप बैठे रहे। बाद में विरोध बढ़ने पर मस्जिद से चले गए। हालांकि फारूक ने कहा कि अगर सिरफिरे लोगों को लगता है कि फारूक डर जाएगा तो उनकी गलती है। मुझे ‘भारत माता की जय’ कहने से कोई नहीं रोक सकता।’

दरअसल इसी हफ्ते जब फारुख अब्दुल्ला पूर्व प्रधानमंत्री अचल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में गए थे तो उन्होंने अपनी संबोधन के दौरान जय हिंद और भारत माता की जय के नारे लगाए। अपने संबोधन के दौरान फारुख अब्दुल्ला ने जोरदार स्पीच दी और जयकार किया। कश्मीर के अलवादी इसी बात से नाराज थे। उन्हें फारूख अब्दुला का जय हिंद और भारत माता की जयकार करना बर्दाश्त नहीं हुआ, जिसका विरोध फारुख अब्दुल्ला को बकरीद के मौके पर झेलना पड़ा। लोगों ने उनके खिलाफ शर्म-करो शर्म-करो के नारे भी लगाए।

वायरल हो रहा है वीडियो
नेशनल कॉन्फ्रेंस के चीफ और पूर्व सीएम को अपने राज्य में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें लोग फारूख अब्दुला के खिलाफ शर्म करो, शर्म करो के नारे लगा रहे हैं। इस पूरी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए फारुख अब्दुल्ला ने  कहा कि मैं डरने वाला नहीं हूं। उन्होंने कहा कि अगर अलगाववादियों को लगता है कि मेरा विरोध करने से आजादी आएगी मैं कहना चाहता हूं कि पहले बेगारी, बीमारी और भूखमरी से आजादी पाओ’। उन्होंने कहा कि वक्त आ गया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच एक शांतिपूर्वक वार्ता हो।  उन्होंने कहा कि अब भारत-पाक के बीच शांतिपूर्ण बातचीत का वक्त आ गया है। नफरतों से बाहर निकलने की जरूरत है। यह देश हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और और यहां रहने वाले लोगों का है।  उन्होंने कहा कि ये मेरे ही लोग हैं, मैं अपने  फर्ज से भाग नहीं सकता हूं। मुझे अ पने लोगों के लिए काम करना है।  ये ऐसा कर रहे हैं क्योंकि ये गुमराह हैं। उन्होंने कहा  कि ये लोग अगर ये समझते हैं कि ऐसे आजादी आएगी तो मैं इनको कहना चाहता हूं कि पहले बेरोजगारी, बीमारी और भुखमरी से आजादी पाओ।

कश्मीर में इन अलगाववादियों का  विरोध सिर्फ फारुख अब्दुल्ला को ही नही ंबल्कि सेना  के जवानों को भी झेलना पड़ा। ईद के मौके पर श्रीनगर, कुलगाम, अनंतनाग समेत घाटी के कई शहरों में अलगाववादियों ने खूब बवाल मचाया। नमाज के बाद उपद्रवियों ने सेना के वाहनों पर पत्थर फेंके। इतना ही नहीं अलगाववादियों और पत्थरबाजों ने इस विरोध  प्रदर्शन   के  दौरान पाकिस्तान और आईएसआईएस का झंडा लहराया और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। सेना को उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

माज अदा कर लौट रहे पुलिसकर्मी की निर्ममता से हत्या 

घाटी में उपद्रवियों ने मुकाबरक मौके पर भी अशांति फैलाने का कोई  मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने नमाज अदा कर लौट रहे पुलिसकर्मी फयाज अहमद शाह की उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी। वह पुलिस में भर्ती के बाद प्रशिक्षण ले रहे थे। फयाद ईद मनाने अपने घर  लौटे थे, लेकिन इन उपद्रवियों ने अपने  सियासी फायदे के लिए उनकी हत्या कर दी। इसेसे पहले मंगलवार रात को आतंकवादियों ने  पुलवामा से अगवा भाजपा कार्यकर्ता शबीर अहमद बट की भी गोली मार कर हत्या कर दी। उसका शव कुपवाड़ा में एक खेत से मिला। बट को सशस्त्र सुरक्षाकर्मी प्रदान किए गए थे, लेकिन इससे बावजूद आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी। शबीर अहमद की हत्या से घाटी में पार्टी में खौप का माहौल है। वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कश्मीर में भाजपा कार्यकर्ता शबीर की हत्या की कड़ी निंदा की है।

क्यों हो रहा है विरोध
दरअसल अलगाववादी कश्मीर के नाम पर अपनी सियासी रोटी सेंक रहे हैं। अपनी सियासत के लिए वो भारत-पाकिस्तान के संबंधों में सुधार नहीं चाहते हैं। उनका विरोध प्रदर्शन फारुख अब्दुला के खिलाफ नहीं बल्कि उस सोच के लिए थी, जिसकी वजह से घाटी में शांति बहाल नहीं हो पा रही है। भारत- पाक की इस लड़ाई  में इन अलगाववादियों की सिसायत चल रही है। लोगों के दिनों में नफरत फै लाकर  वो  न केवल घाटी में अशांति फैला रहे  हैं  बल्कि पाकिस्तान से हो रही घुसपैठ को बल दे रहे  हैं।

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