कम उम्र में शादी का अंजाम,जल्दी बनी माँ,बिगड़ा कल

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34 लाख लड़कियां कम उम्र में बन गयी माँ,एक रिपोर्ट से खुलासा

देश के बच्चों और किशोरियों पर काम करनेवाली संस्था क्राई ने एक चौंकानेवाला रिपोर्ट पेश किया है। विश्व जनसँख्या दिवस पर भारत में बच्चों के हालात पर किये गए एक बड़े सर्वेक्षण से यह पता चला है कि देश में पंद्रह से उन्नीस आयुवर्ग के चालीस फीसद बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में दस करोड़ बच्चे अपने मूल अधिकारों से वंचित हैं और इनकी तादाद लगातार बढ़ती ही जा यही है। खासकर बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता और पोषण कुछ बड़े मुद्दे हैं जिनपर गंभीर होने की जरूरत है।
दस करोड़ किशोर-किशोरियों पर किये गए अध्ययन के बाद इस रिपोर्ट से कुछ और बड़े चौंकानेवाले खुलासे सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश में हर तीन में से महज एक बच्चा ही सही उम्र में बारहवीं कक्षा पास करता है। अभी एक करोड़ नव्वे लाख ऐसे बच्चे हैं जो पंद्रह से अठारह आयुवर्ग के हैं और पढ़ाई छोड़ चुके हैं। अभी विवाहित किशोरियों में बयानवे लाख (92) ऐसी हैं जिनकी कम उम्र में शादी कर दी गयी। जिनमे पंद्रह से उन्नीस आयुवर्ग की सैंतीस लाख बच्चियों में से चौंतीस लाख बच्चियां अब तक माँ बन चुकी है। पंद्रह से उन्नीस आयुवर्ग की पच्चीस फीसदी बच्चियां बलात्कार की शिकार हुयी है।
ऐसा नहीं है कि ये आंकड़ा महज इसी साल देखने को मिला है। इसी साल के शुरुआती महीनो में बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू ) के एक और विश्लेषण के मुताबिक भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चा यौन अपराध का शिकार बनता है और पिछले 10 सालों में नाबालिगों के खिलाफ अपराध में 500 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है। जारी रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया था कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध के मामलों में से 50 प्रतिशत से भी ज्यादा महज पांच राज्यों में दर्ज किए गए इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

इसमें कहा गया,’पिछले 10 सालों में नाबालिगों के खिलाफ अपराध में 500 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई और 2016 में 1,06,958 मामले सामने आए जबकि 2006 में यह संख्या महज18,967 थी।’बाल यौन अपराध संरक्षण ( पॉक्सो ) अधिनियम के तहत आने वाले अपराधों के 2016 में हुए विश्लेषण के मुताबिक यौन अपराध देश में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों का एक तिहाई हिस्सा हैं। रिपोर्ट में कहा गया,‘‘ यह देखना खतरनाक है कि भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चे के खिलाफ यौन अपराध होता है।’’

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई जब जम्मू-कश्मीर के कठुआ और उत्तर प्रदेश के उन्नाव में नाबालिगों के साथ हाल में हुई बलात्कार की घटनाओं को लेकर देश में आक्रोश व्याप्त था। इसमें कहा गया,‘‘जहां बच्चों के खिलाफ अपराध के दर्ज मामलों में से 15 प्रतिशत मामले उत्तर प्रदेश के हैं, इसके बाद महाराष्ट्र (14 प्रतिशत ) और मध्य प्रदेश (13 प्रतिशत) आते हैं।’’

ये तो महज एक संस्था के द्वारा किये गए खुलासे हैं,इस तरह की कई और संस्थाए भी बच्चों पर अध्ययन और कार्य करती है। कई सरकारी आयोग और मंत्रालय भी इस ओर काम करने का दावा करते हैं। लेकिन सवाल उठता है कि स्थितियां सुधरने के बजाय और बदतर क्यों होती जा रही है ?कई बार न्यायलय ने इन विषयों पर डंडा भी चलाया लेकिन हक़ीक़त में कोई बदलाव आया हो नजर नहीं आता। कई राज्यों में बाल संरक्षण परिषद् या आयोग गठित तो हो चुका है परन्तु वो महज कागजी खानापूर्ति भर है। कई संस्थाओं पर सवाल भी गंभीर उठे हैं जो समाज और बाल सेवा के नाम पर काली करतूतों को अंजाम देते आ रहे हैं। हाल ही में मदर टेरेसा से जुडी संस्था मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी ने समाज सेवा के लिए क्या किया है सबके सामने है? झारखण्ड जैसे अति पिछड़े राज्य जहाँ आदिवासियों-दलितों-पिछडो की आबादी काफी है वहां अशिक्षा,गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाते हुए इन्होने मानव तस्करी के काम को अंजाम दिया। ये अकेली ऐसी संस्था नहीं है जो परदे की आड़ में इस तरह के काम को अंजाम देती है। इसके अलावा देश के कई हिस्सों में ये अनवरत जारी है। और इसकी मुख्य वजह है, प्रशाशनिक विफलता,उनकी सहभागिता।

ऐसे में जरूरी यह है कि सरकार खासकर राज्य सरकार इस और गंभीर पहल करें ताकि तैयार होते भविष्य को बर्बाद होने से बचाया जाये,बच्चों की जरूरतों और उनके विकास को ईमानदार रफ़्तार देकर दूसरों की नजर में भारत की ख़राब हो रही छवि को सुधारा जा सके।

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