नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को उत्‍तर प्रदेश के संत कबीर नगर के मगहर में पहुंचे। मोदी ने कबीर की मजार पर चादर चढ़ाई, उन्होंने कबीर अकादमी का शिलान्‍यास किया। कबीर के मजार पर मोदी की दस्तर बीजेपी के लिए 2019 का आगाज माना जा रहा है। ऐसे में लोगों को थोड़ी हैरानी हुई कि राम राम जपने वाले बीजेपी कबीर की मजार पर कैसे पहुंच गए? हैरानी की तो कोई बात ही नहीं क्योंकि राजनीति में कुछ भी बिना स्वार्थ के लिए किया जाता है। कबीर के जरिए बीजेपी ने दलित, पिछड़े, वर्ग को आकर्षित करने की कोशिश की है। उपचुनावों में लगातार मिल रही हार के बाद बीजेपी के लिए पिछड़ी जाति पर एक बार फिर से पकड़ बनाने की जरूरत है। यूपी में बुआ और बबुआ नए तरीके की राजनीति कर रहे हैं, ऐसे में बीजेपी ने एक बार पिर से पिछड़े-दलितों पर दांव चला है।

पीएम मोदी अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की इस छवि का बीजेपी को खूब फायदा हुआ। साल 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने न रेन्द्र मोदी को सबसे बड़ा चेहरा बनाकर पेश किया और इसका भी फायदा उन्हें हुआ। दलितों और पिछड़े वर्ग ने माया और मुलायम को छोड़कर बीजेपी का साथ दिया। लेकिन एक साल के भीतर-भीतर बीजेपी से वोटर रूठने लगे और गोरखपुर, फूलपुर, कैराना लोकसभा उपचुनाव में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। अमित शाह अब दोबारा रिस्क लेने के मूड में नहीं लग रहे हैं। योगी आदित्यनाथ की गलतियों की वजह से वो 2019 में किसी भी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं। यही वजह है पीएम मोदी अब खुद यूपी के मैदान में उतरे हैं। उन्‍होंने अटल-आडवाणी और कल्‍याण सिंह की तरह राम नाम जपना समझना ठीक नहीं समझा और महागठबंधन को तोड़ने के लिए उन्होंने कबीर का सहारा लिया। पीएम मोदी ने कबीर के मजार पर दस्तक दी तो इसका सीधा असर ढाई करोड़ कबीरपंथियों के दरवाजे को खटखटाने जैसा है। हालांकि अमित शाह का ये फॉर्मूला कितना फिट बैठता है ये तो समय ही बताएगा, लेकिन उन्होंने एक बार फिर से पीएम मोदी की लहर फैलाने की शुरुआत कर दी है।

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