कसाब नहीं पकड़ा गया होता, तो मुंबई अटैक मामले में भी RSS को फंसा देती कांग्रेस!

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लेखक-अभिरंजन कुमार जाने-माने पत्रकार, कवि और मानवतावादी चिंतक हैं। ये लेख लेखक का निजी विचार है।

(1) कांग्रेस ने 26 नवंबर 2008 के मुंबई अटैक मामले में आरएसएस को फंसाने की साज़िश रची थी, लेकिन अजमल कसाब के जीवित पकड़े जाने से उसका प्लान फेल हो गया।

(2) देश में आजकल जो बहुत सारी अप्रिय घटनाओं का शोर सुनाई देता है, कोई आश्चर्य नहीं कि उनमें से अनेक में कांग्रेस और उसके सहयोगियों का हाथ हो। लेखक अभिरंजन कुमार ने ये आरोप मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में एनआईए कोर्ट का फैसला आने के बाद लगाए हैं, जिसमें कोर्ट ने मामले के स्वामी असीमानंद समेत सभी पांचों आरोपियों को बरी कर दिया है।

हम यहां उनका पूरा फेसबुक पोस्ट ज्यों का त्यों छाप रहे हैं। देखें-

बाटला हाउस एनकाउंटर को भी कांग्रेस पार्टी ने फ़ेक एनकाउंटर बता दिया था, इसके बावजूद कि उस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के तेज़-तर्रार अफसर मोहनलाल शर्मा शहीद हो गए थे। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने उस एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादियों के दुख में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के रो पड़ने का भी दावा किया था।“अगर अजमल कसाब को जीवित नहीं पकड़ा जाता, तो 26 नवंबर 2008 के मुंबई अटैक को भी कांग्रेस पार्टी आरएसएस का षडयंत्र साबित करने का प्लान बना चुकी थी। दिग्विजय सिंह और एआर अंतुले समेत उसके कई नेताओं के तब के बयान इस बात की गवाही देते हैं। दिग्विजय सिंह ने तो एक उर्दू अखबार के संपादक रहे अजीज बर्नी की किताब का विमोचन भी किया था, जिसका शीर्षक था- “26/11- आरएसएस की साज़िश”

आज एनआईए कोर्ट से मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में स्वामी असीमानंद समेत सभी आरोपियों के बरी होने से भी यह बात साबित हो गई है कि कांग्रेस पार्टी इस देश में किस स्तर की घृणित राजनीति करती रही है। इससे यह भी स्पष्ट है कि कांग्रेस अपने राजनीतिक विरोधियों को कुचलने के लिए कैसे-कैसे हथकंडे अपना सकती है। यानी इमरजेंसी से लेकर अब तक कांग्रेस का चरित्र रत्ती भर नहीं सुधरा है।

इसीलिए, मैं हमेशा कहता हूं कि लोकतंत्र के तो केवल चार स्तम्भ हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी के चालीस स्तम्भ हैं। उसके कौन से स्तम्भ कब कौन-सा बवाल खड़ा कर दें, कोई नहीं जानता। इस देश में आजकल जो बहुत सारी अप्रिय घटनाओं का शोर सुनाई देता है, कोई आश्चर्य नहीं कि उनमें से अनेक में कांग्रेस और उसके चालीस स्तम्भों का हाथ हो। दुर्भाग्यपूर्ण।”