जिस देश में “तन की बात” से सोच ऊपर नहीं जा रही हो वहां क्या “मन की बात ” बेमानी है

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देश उबल रहा है। कठुआ में 8 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी ने देश को शर्मिंदा कर दिया है। वहीं सुशासन का ढ़ोल पीटने वाले योगी सरकार उन्नाव रेप को छुपाने में नाकामयाब रही है। बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर ने 17 साल की लड़की को पीड़ित बनाया तो घाटी में 8 साल की मुस्लिम बच्ची को साजिश के तहत घिनौने अपराध का सामना कर ना पड़ा। उन्नाव रेप मामले में आरोपी बीजेपी विधायक सपा-बसपा की सेवा कर चुके हैं। विधायक कुलदीप सेंगर चौथी बार चुनाव जीतकर पहुंचे हैं तो पार्टी में उनकी धमक भी है। सपा-बसपा के बाद बीजेपी पहुंचे कुलदीप सेंगर पर 17 साल की लड़की से जून 2017 में बलात्कार का आरोप लगा है। मामला इस लिहाज से खास हो गया जब पुलिस ने पीड़िता की शिकायत लिखने से इंकार कर दिया और बीजेपी की सत्ताधारी सरकार और पार्टी नेताओं ने मामले की लीपापोती शुरू कर दी। पीड़िता ने कोर्ट का सहारा लिया को उनपर मामले को वापस लेने का दवाब बनाया जाने लगा। जब इंसाफ नहीं मिला तो पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह का प्रयास किया। फिर न्याय के बजाए पीड़िता के पिता को गिरफ्तार कर लिया गया, जहां पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई। मामले का राजनीतिकरण किया जाना साफ-साफ दिखने लगा, लेकिन मीडिया की नजरों से मामला छुप न सका और अब मामला सीबीआई तक पहुंच गया।

वहीं जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर में कठुआ गैंगरेप मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। सोची-समझी साजिश के तहत 8 साल की मुस्लिम बच्ची के साथ मंदिर में गैंगरेप और फिर उसकी हत्या कर दी गई। मुस्लिम गुर्जर समुदाय से ताल्लुक़ रखने वाली पीड़िता 10 जनवरी को घोड़ा चराने गई थी, जिसके बाद से वो लापता हो गई थी। 17 जनवरी को बच्ची का शव जब जंगल में मिला तो उसे देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं ता कि उसके साथ क्या हुआ होगा। बच्ची के पैर टूटे हुए थे और उसके नाख़ून काले पड़ गए थे।

बच्ची को नशीली दवाइयां दी जा रही थी। जांच में जो बातें सामने आई वो चौंकाने वाली थी। बच्ची को रसाना गांव के एक मंदिर में रखा गया था जहां उसके साथ पुलिसकर्मियों समेत एक नाबालिग़ और मंदिर के संरक्षक ने कई दिनों तक बलात्कार किया और फिर बाद में उसकी हत्या कर दी। क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि मंदिर के संरक्षक सांजी राम ने अपने नाबालिग़ भतीजे और बेटे के साथ मिलकर यह साज़िश रची थी, ताकि मुस्लिम गुर्जर समुदाय के लोग वो इलाका छोड़कर चले जाए। हैरानी तो तब हुई जब लोगों ने इन गैंगरेप के आरोपियों के समर्थन में तिंरगा लेकर रैली निकाली। शायद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब गैंगरेप के आरोपियों के समर्थन में तिरंगे के साथ रैली निकाली गई हो, जिसमें बीजेपी के दो नेता भी शामिल हुए। अब ऐसे में ये कहना कैसे गलत होगा कि जिस देश में लोग तन से ऊपर सोच नहीं पा रहे हैं उस देश में मन की बात बेमानी है।