Sep 13, 2016

न्याय का माथा ऊंचा करने वाले जस्टिस को जानिए

Media Sarkar Desk

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सीवान के सुपर-स्टार शहाबुद्दीन को जमानत देकर न्याय का माथा ऊंचा करने वाले जस्टिस जितेंद्र मोहन शर्मा भी बिहार के ही हैं। आइए, उनके बारे में कुछ बुनियादी जानकारियां हासिल करते हैं-

  • नाम- जितेंद्र मोहन शर्मा
  • जन्म तिथि- 2 जुलाई 1956
  • पटना हाई कोर्ट ज्वाइन करने की तारीख- 21 अप्रैल 2014
  • सेवानिवृत्ति की तिथि- 2 जुलाई 2018

शिक्षा-

गया जिले के सिंदौरी कोंच इलाके के राज कुमारी देवी हाई स्कूल से 1972 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। बीएससी और एलएलबी की डिग्रियां उन्होंने मगध विश्वविद्यालय, बोधगया से हासिल कीं।

न्याय के क्षेत्र में-

  • लोगों को न्याय दिलाने के क्षेत्र में वे 1983 में आए, जब गया के सिविल कोर्ट में एक वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की।
  • 28 मई 1997 को वे डाल्टनगंज, पलामू में अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त हुए।
  • फिर उन्हें तरक्की देकर दरभंगा और आरा फैमिली कोर्ट का जज बनाया गया।
  • बाद में उन्होंने बक्सर, सारण और मुंगेर ज़िलों में ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश के तौर पर भी योगदान दिया।
  • उन्होंने गायघाट, पटना स्थित बिहार न्यायिक अकादमी के निदेशक के तौर पर भी अपनी सेवाएं दीं।

न्याय का माथा ऊंचा करने में जस्टिस जितेंद्र मोहन शर्मा के उल्लेखनीय योगदान की तरफ़ लोगों का ध्यान सीवान के सुपर-स्टार शहाबुद्दीन को बहु-चर्चित तेजाब कांड के गवाह की हत्या के मामले में ज़मानत दिये जाने के बाद गया है। हालांकि इसी मामले में फरवरी 2016 में उन्होंने शहाबुद्दीन की याचिका ख़ारिज कर दी थी। इसके बाद तेजाब कांड और गवाह की हत्या की जांच और सबूतों के मामले में क्या प्रगति हुई, वह तो नहीं मालूम, लेकिन अलग-अलग कारणों से सुपर-स्टार शहाबुद्दीन लगातार सुर्खियों में बने रहे।

सबसे पहले, बिहार सरकार में राष्ट्रीय जनता दल कोटे से मंत्री अब्दुल गफूर सीवान जेल में उनसे मिलने पहुंचे। कुछ ही दिनों बाद यानी अप्रैल की शुरुआत में बिहार की सरकार के बड़े साझीदार लालू प्रसाद यादव जी ने जेल में रहते हुए ही उन्हें अपनी पार्टी आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य के तौर पर शामिल कर लिया। इसके बाद मई में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन के हाथ का आरोप भी उछला, लेकिन कानून का हाथ उनके शागिर्द माने जाने वाले लड्डन मियां तक जाकर ही रुक गया। फिर मई में सीवान जेल में दरबार लगाते पकड़े जाने के बाद रातों-रात उन्हें भागलपुर जेल में ट्रांसफर किया गया। ताज़ा-ताज़ा मामला यह है कि जस्टिस जितेंद्र मोहन शर्मा ने इसी 7 सितंबर को तेजाब कांड के गवाह की हत्या के मामले में उन्हें जमानत दे दी, जिसे हम न्याय का माथा ऊंचा करने में उल्लेखनीय योगदान बता रहे हैं और जिसके बाद शहाबुद्दीन ने संभवतः भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रिहाई काफिला निकाला, जिसमें सत्तारूढ़ गठबंधन के कई नेता भी शामिल हुए।

जस्टिस जितेंद्र मोहन शर्मा ने मोकामा के महाबली नेता अनंत सिंह को भी फरवरी 2016 में संजीत पहलवान हत्याकांड, मार्च 2016 में पुटूस हत्याकांड और अगस्त 2016 में जवाहर सिंह हत्याकांड में जमानत दे दी थी। यह अलग बात है कि क्राइम कंट्रोल एक्ट लगे होने की वजह से आदरणीय अनंत सिंह जी का रहना-सहना और खाना-पीना अभी जेल में ही होता रहेगा।

 

 

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Comments to न्याय का माथा ऊंचा करने वाले जस्टिस को जानिए

  • ऐसे कितने ही शहाबुद्दीन इस देश में मौजूद हे क्योकि यह एक राज नेता हे इसलिऐ इस पर सब का ध्यान गया हे हमारे अंता जिला बारां राजस्थान में तो इससे भी ज्यादा हालात ख़राब हे कोर्ट में इस्तगासा पेश करने के बाद भी मुल्जिमो पर FIR तक दर्ज नहीं होती व् कोई भी कार्यवाही नहीं होती पुलिस से लेकर मजिस्ट्रेट तक बिकाऊ है

    SN suman September 14, 2016 9:55 AM Reply
  • Mere khyal se Justice Jitendra Mohanlal Sharma ji ko unke is ulekhaniye karya ke liye ek medel to banta hi hai. Ab Bharat ratna to milne se raha. Unhe kam se kam Bihar ratna jarur milne chahiye. Kyoki unhe abhi is tarah k kitne karya karna rah gye hai. Kitne maa k god khali karne walo ko bawemusakat Bari karna hai.

    Nikesh Kumar Ojha September 14, 2016 10:46 AM Reply
    • Shortly he will be elevated to Supreme Court as the advocate of Jayalalitha corruption case is elevated. The collegium system is adopted to reward all corrupt and inefficient people of the judiciary like justice Sharma. It is better to keep posts of HCs and SC vacant than elevating such non deserving people.

      Ashok Jain September 15, 2016 12:43 PM Reply
  • Nice

    Aditya September 14, 2016 1:28 PM Reply
  • In se bhi pooch lo kiya mila hai

    Manoj kumar September 15, 2016 11:12 AM Reply
  • Chief Justice of India is busy in criticising PM for non deployment of judges in High Courts. He has however closed his eyes from rampant corruption in judiciary and even never bothered that HCs are not even complying to their instructions. Recently during his own tenure a few of the judgement s of HCs had lowered the image of judiciary so much so that common man is loosing faith in the justice delivery system of the country e.g. Salman Khan Case, Jaylalitha case, Shahabuddin case etc. etc. When matters in the interest of judiciary, lawyers and politicians are filed they are heard immediately but any matters against this nexus are delayed for decades.

    Ashok Jain September 15, 2016 12:37 PM Reply
  • this is a sad commentary on our judicial system the British legacy of the judicial system urgently and imperatively require a re look.

    Jaishankar pd September 18, 2016 12:54 PM Reply

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